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शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: आपातकाल के बंदियों को मिलेगी ₹10,000 पेंशन, बंगाल के इतिहास की किताबों में होगा सुधार

ICN24 Newsroom 10 अग॰ 2026, 03:37 pm
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान: आपातकाल के बंदियों को मिलेगी ₹10,000 पेंशन, बंगाल के इतिहास की किताबों में होगा सुधार

पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने 1975 के आपातकाल के दौरान जेल गए 325 लोगों के लिए मासिक पेंशन और स्कूली इतिहास के पुनरीक्षण की योजना की घोषणा की है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दो बड़े महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, अधिकारी ने घोषणा की कि 1975 के आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले 325 'लोकतंत्र के सेनानियों' को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने बंगाल के स्कूली इतिहास के पाठ्यक्रमों की समीक्षा और उनमें सुधार के लिए एक विशेष समिति के गठन की भी बात कही है। शुभेंदु अधिकारी का यह कदम 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों ने उस कठिन दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी स्वतंत्रता का बलिदान दिया, उन्हें अब तक वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इन 325 व्यक्तियों की पहचान कर चुकी है और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना न्याय की दिशा में एक कदम है। इतिहास की किताबों में बदलाव का प्रस्ताव देते हुए अधिकारी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से बंगाल के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में 'वैचारिक पक्षपात' के तहत इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उनके अनुसार, प्रस्तावित पैनल उन ऐतिहासिक तथ्यों को पुनर्स्थापित करेगा जिन्हें कथित तौर पर राजनीतिक लाभ के लिए हटा दिया गया या बदल दिया गया था। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को बंगाल का वास्तविक और गौरवशाली इतिहास जानने का अधिकार है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय बंगाली प्रवासी अक्सर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मातृभूमि की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। इतिहास के पुनरीक्षण की इस चर्चा का प्रभाव उन प्रवासी परिवारों पर भी पड़ता है जो अपने बच्चों को अपनी विरासत और इतिहास से जोड़ना चाहते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की ये घोषणाएं आगामी चुनावों से पहले वैचारिक ध्रुवीकरण को तेज कर सकती हैं। जहां भाजपा इसे 'ऐतिहासिक भूलों के सुधार' के रूप में देख रही है, वहीं राज्य की सत्तारूढ़ सरकार इसे शिक्षा के 'भगवाकरण' के प्रयास के तौर पर पेश कर सकती है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि शिक्षा और समाज कल्याण राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
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