राजनीति
ओडिशा डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: पुलिस सुधारों पर छिड़ी नई बहस
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 01:39 am
सुप्रीम कोर्ट ओडिशा में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। यह मामला पुलिस सुधारों और पारदर्शिता से जुड़ा है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। यह कानूनी कदम भारत में पुलिस सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और शीर्ष पुलिस पदों पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ओडिशा सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है।
इस मामले की जड़ें 2006 के ऐतिहासिक 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में छिपी हैं। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने के लिए कई सुधार लागू करने का निर्देश दिया था। इन नियमों के अनुसार, राज्य सरकारों को डीजीपी के चयन के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का एक पैनल भेजना होता है। इसके बाद यूपीएससी तीन सबसे योग्य अधिकारियों के नामों की सिफारिश करता है, जिनमें से राज्य सरकार एक का चयन करती है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार ने इस स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए अपनी पसंद के अधिकारी को नियुक्त करने का प्रयास किया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में प्रशासनिक जवाबदेही के मानकों को प्रभावित करता है। कई राज्यों पर अक्सर 'कार्यवाहक डीजीपी' (Acting DGP) नियुक्त करने या यूपीएससी की चयन प्रक्रिया को दरकिनार करने के आरोप लगते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि क्या राज्य सरकारें पुलिस सुधारों के नाम पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रही हैं या वे वास्तव में संवैधानिक मानदंडों का पालन कर रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह समाचार विशेष महत्व रखता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय अक्सर अपने गृह राज्यों में कानून-व्यवस्था और शासन की स्थिति पर बारीकी से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच, भारत में प्रशासनिक पारदर्शिता और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' जैसे मुद्दे निवेश और प्रवासी भागीदारी को सीधे प्रभावित करते हैं। जब शीर्ष पदों पर नियुक्तियां विवादों में आती हैं, तो इससे राज्य की संस्थागत अखंडता पर सवाल उठते हैं।
आने वाले हफ्तों में, जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि ओडिशा सरकार अपने बचाव में क्या तर्क पेश करती है। क्या राज्य अपनी स्वायत्तता का हवाला देगा या न्यायालय पुलिस सुधारों को सख्ती से लागू करने के लिए नए निर्देश जारी करेगा? यह निर्णय न केवल ओडिशा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा जो इसी तरह की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
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