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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला: उच्च शिक्षा छिपाकर छोटी नौकरी पाना कानूनन गलत, पद का असली हकदार नहीं छीन सकता अवसर

ICN24 Newsroom 4 जून 2026, 08:30 pm
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला: उच्च शिक्षा छिपाकर छोटी नौकरी पाना कानूनन गलत, पद का असली हकदार नहीं छीन सकता अवसर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कम योग्यता वाले पदों के लिए डिग्री छिपाना असली हकदारों के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति कम शैक्षणिक योग्यता वाले पदों के लिए आवेदन करते समय अपनी उच्च शिक्षा की जानकारी जानबूझकर छिपाता है, तो वह कानूनन गलत है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि ऐसी कार्रवाई न केवल भर्ती प्रक्रिया के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि यह उन लोगों से रोजगार का अवसर छीनने जैसा है जो वास्तव में उस पद के लिए न्यूनतम योग्यता रखते हैं और जिनके पास अन्य विकल्प सीमित हैं। यह मामला सिंडिकेट बैंक में अटेंडेंट के पद पर नियुक्ति से जुड़ा था। बैंक ने भर्ती के लिए यह शर्त रखी थी कि उम्मीदवार स्नातक (ग्रेजुएट) नहीं होना चाहिए। हालांकि, एक उम्मीदवार ने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री छिपाकर यह नौकरी प्राप्त कर ली। जब बैंक को इस सच्चाई का पता चला, तो उसने कर्मचारी को सेवा से मुक्त कर दिया। इसके बाद मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया। मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व में कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसकी बहाली का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तर्क दिया कि 'अति-योग्यता' (over-qualification) कभी-कभी किसी पद के लिए अयोग्यता बन जाती है, खासकर तब जब नियोक्ता ने स्पष्ट रूप से निम्न शैक्षणिक स्तर के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का नीतिगत निर्णय लिया हो। बेंच ने टिप्पणी की कि कुछ पद विशेष रूप से समाज के उन वर्गों के लिए आरक्षित होते हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके हैं। यदि उच्च डिग्री धारक अपनी जानकारी छिपाकर इन पदों पर कब्जा कर लेते हैं, तो वे उन 'असली हकदारों' का हक मारते हैं जिनके पास आजीविका के साधन सीमित हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह निर्णय प्रासंगिक है। कई बार प्रवासी भारतीय (NRIs) या छात्र वीजा पर आए लोग भारत या ऑस्ट्रेलिया में नौकरी आवेदन के दौरान अपनी योग्यता को लेकर संशय में रहते हैं। यह फैसला स्पष्ट करता है कि रोजगार अनुबंधों में सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता सर्वोपरि है। जानकारी छिपाना भविष्य में कानूनी जटिलताओं और करियर की समाप्ति का कारण बन सकता है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि नियोक्ता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि उसे किस स्तर की शैक्षणिक योग्यता वाले कर्मचारी की आवश्यकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी जोड़ा कि गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई कोई भी नियुक्ति शुरू से ही अमान्य (void ab initio) मानी जाएगी। यह आदेश उन सभी सरकारी और निजी क्षेत्रों के लिए एक नजीर बनेगा जहां विशिष्ट पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं। अंततः, कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के 2024 के आदेश को रद्द करते हुए बैंक की कार्रवाई को सही ठहराया।
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