राजनीति
अनुच्छेद 370: 'काला दिवस' विरोध प्रदर्शनों से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अलर्ट, घाटी में पुलिस बल तैनात
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 08:37 pm

अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण की बरसी पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे दलों द्वारा 'काला दिवस' मनाने के आह्वान के बीच जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों द्वारा आहूत 'काला दिवस' विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। 5 अगस्त की तारीख भारत के आधुनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है, जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।
श्रीनगर के लाल चौक सहित संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने प्रमुख चौराहों पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं और वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ये कदम किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं। राजनीतिक नेताओं की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि सार्वजनिक शांति भंग न हो।
विपक्षी दलों, विशेष रूप से महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी और फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस दिन को 'काला दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की है। इन दलों का तर्क है कि 2019 का निर्णय कश्मीरियों की पहचान और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार था। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस दिन को 'विलय दिवस' या 'सशक्तिकरण दिवस' के रूप में देखती है, जिसमें उनका तर्क है कि इस बदलाव ने क्षेत्र में विकास और शांति के नए रास्ते खोले हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से वे जो जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं, यह मुद्दा हमेशा से भावनात्मक रहा है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय इस राजनीतिक घटनाक्रम को बारीकी से देखते हैं। हाल के वर्षों में, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के बीच कश्मीर के संवैधानिक बदलावों को लेकर अलग-अलग राय देखी गई है, जहां कुछ लोग इसे भारत की अखंडता के लिए जरूरी मानते हैं, वहीं अन्य मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर चिंतित रहते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ सामग्री को फैलने से रोका जा सके। श्रीनगर के कई हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की गति को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा। फिलहाल, पूरी घाटी में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है।
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