ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
सुजान सिंह पार्क विवाद: रियल एस्टेट कंपनी ने लीज उल्लंघन के आरोपों को नकारा, केंद्र को सौंपा जवाब
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:07 am
दिल्ली के सुजान सिंह पार्क को लेकर जारी विवाद में रियल एस्टेट कंपनी ने केंद्र सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि 1945 की लीज शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया।
नई दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित रिहायशी इलाकों में से एक, सुजान सिंह पार्क को लेकर केंद्र सरकार और निजी रियल एस्टेट कंपनी के बीच कानूनी खींचतान तेज हो गई है। सुजान सिंह पार्क लिमिटेड ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिस का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि कंपनी ने 1945 के मूल लीज समझौते की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। यह मामला दशकों पुराना है, जिसमें सरकार ने दावा किया था कि लीज को 1960 में ही रद्द कर दिया गया था।
केंद्र सरकार के भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने पहले यह आरोप लगाया था कि कंपनी ने लीज डीड की शर्तों को तोड़ा है, जिसके आधार पर सरकार ने संपत्ति पर पुनः कब्जा करने या 'री-एंट्री' की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। सरकार का तर्क है कि 1945 में दिए गए इस पट्टे को 1960 में ही समाप्त घोषित कर दिया गया था। हालांकि, कंपनी ने अपने विस्तृत जवाब में इन दावों को आधारहीन बताया है। कंपनी का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से इस संपत्ति का रखरखाव कर रहे हैं और सरकार के पास उल्लंघन साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
यह विवाद ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय (प्रवासी भारतीयों) के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों की पैतृक संपत्तियां दिल्ली जैसे महानगरों के प्राइम इलाकों में स्थित हैं। सुजान सिंह पार्क जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में कानूनी पेचीदगियां यह दर्शाती हैं कि भारत में संपत्ति कानूनों और पुराने लीज समझौतों का प्रबंधन कितना जटिल हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों का परिणाम एनआरआई (NRI) निवेश और उनकी संपत्ति सुरक्षा की धारणा को प्रभावित करता है।
सुजान सिंह पार्क, जो खान मार्केट के समीप स्थित है, दिल्ली के लुटियंस जोन के इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका निर्माण प्रसिद्ध ठेकेदार और लेखक खुशवंत सिंह के पिता शोभा सिंह ने करवाया था। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण होने के कारण, इस संपत्ति की कीमत और इसका मालिकाना हक हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। कंपनी ने अदालत और संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह दलील दी है कि सरकार द्वारा दशकों बाद लीज रद्द करने की बात उठाना कानूनी रूप से तर्कसंगत नहीं है, खासकर तब जब लंबे समय तक इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी।
वर्तमान में, यह मामला कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि सरकार अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो यह मामला लंबी अदालती कार्यवाही की ओर बढ़ सकता है। संपत्ति विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादों में अक्सर 'लिमिटेशन एक्ट' और 'प्रॉपर्टी राइट्स' की व्याख्या मुख्य भूमिका निभाती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय निवेशक जो भारत के रियल एस्टेट बाजार में सक्रिय हैं, वे इस मामले के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह विरासत में मिली संपत्तियों के कानूनी भविष्य के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
संबंधित ख़बरें
ब्रेकिंगब्रेकिंग
'भौतिक दुनिया से परे': शशि थरूर द्वारा पीएम मोदी की 'प्रशंसा' पर कांग्रेस का कटाक्ष, पार्टी के भीतर बढ़ा विवाद
कांग्रेस ने शशि थरूर के उस दावे पर कटाक्ष किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ नाविकों का मुद्दा उठाया। पवन खेड़ा ने इसे काल्पनिक बताया।
20 जून 2026, 03:43 pm
ब्रेकिंगब्रेकिंग
भानगढ़ का रहस्य: क्या यह वाकई कोई अभिशाप है या केवल विज्ञान और प्रकृति का खेल?
राजस्थान का भानगढ़ किला अपनी रहस्यमयी कहानियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन स्थानीय निवासी और विशेषज्ञ इन दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण बताते हैं।
20 जून 2026, 03:40 pm
ब्रेकिंगब्रेकिंग
बिल गेट्स की बड़ी टेक कंपनियों को चेतावनी: डेटा सेंटर निर्माण में 'आधी सच्चाई' स्वीकार नहीं करेंगे अमेरिकी
बिल गेट्स ने अमेज़न और गूगल जैसी कंपनियों को आगाह किया है कि डेटा सेंटर के नाम पर जनता पर बिजली का बोझ डालना महंगा पड़ेगा।
20 जून 2026, 03:28 pm
