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भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती क्वाड की भविष्य की प्रासंगिकता के लिए अनिवार्य: रिपोर्ट

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 03:31 am
भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती क्वाड की भविष्य की प्रासंगिकता के लिए अनिवार्य: रिपोर्ट

नई दिल्ली में हुई क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड की सफलता का आधार है।

नई दिल्ली में आयोजित क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद विशेषज्ञों और राजनयिकों ने एक स्वर में यह स्वीकार किया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत और अमेरिका के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध अनिवार्य हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quad) की भविष्य की प्रासंगिकता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि नई दिल्ली और वाशिंगटन तकनीकी और रणनीतिक मोर्चों पर कितनी निकटता से काम करते हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के लिए नया ढांचा है। ये पहल न केवल चीन पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक लचीला और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ऑस्ट्रेलिया के लिए भी यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि कैनबरा लगातार एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत की वकालत करता रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच सहयोग अब केवल रक्षा सौदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है। क्वाड के अन्य सदस्य, ऑस्ट्रेलिया और जापान, इन दोनों महाशक्तियों के बीच के समन्वय को एक सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह रणनीतिक निकटता आर्थिक और पेशेवर अवसरों के नए द्वार खोलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'पैक्स सिलिका' पहल के माध्यम से क्वाड देश डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिज ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक संसाधनों पर किसी एक देश का एकाधिकार न रहे। यह ऑस्ट्रेलिया जैसे खनिज-संपन्न देशों और भारत जैसे बड़े बाजार वाले देशों के बीच एक सेतु का काम करेगा। निष्कर्षतः, क्वाड का अस्तित्व और इसकी प्रभावशीलता भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई पर टिकी है। यदि ये दोनों राष्ट्र अपने मतभेदों को दरकिनार कर रणनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो यह न केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।
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