राजनीति
अरुणाचल में 27 स्थानों की सटीक मैपिंग: चीन के 'नाम बदलने' के खेल पर भारत का कड़ा पलटवार
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 01:37 am

भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के 27 प्रमुख क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग शुरू की है, जो सीमा विवाद के बीच चीन के फर्जी दावों को विफल करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम है।
नई दिल्ली/ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताने की चीन की विस्तारवादी नीति को भारत ने अब तकनीकी और रणनीतिक मोर्चे पर मात देने की तैयारी कर ली है। भारत सरकार ने राज्य के 27 संवेदनशील और प्रमुख इलाकों की 'पक्की मैपिंग' करने का निर्णय लिया है। यह कदम चीन के उन प्रयासों का सीधा जवाब है, जिसके तहत वह समय-समय पर भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलकर उन्हें अपना बताने का ढोंग करता रहा है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस मैपिंग प्रोजेक्ट का उद्देश्य इन क्षेत्रों की सटीक भौगोलिक स्थिति, सीमाओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों को डिजिटल रूप से सुरक्षित करना है। भारत के महासर्वेक्षक (Surveyor General of India) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस कार्य में अत्याधुनिक ड्रोन और उपग्रह तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में मदद मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के दावों को और अधिक मजबूती मिलेगी।
चीन पिछले कुछ वर्षों में कई बार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न गांवों, पहाड़ों और नदियों के चीनी नाम जारी कर चुका है। बीजिंग की इस 'नामकरण कूटनीति' (Naming Diplomacy) को भारत ने हमेशा सिरे से खारिज किया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। नए नामों की सूची जारी करने से हकीकत नहीं बदलती। अब मैपिंग के जरिए भारत जमीनी स्तर पर अपनी संप्रभुता को और अधिक पुख्ता कर रहा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के परिप्रेक्ष्य में यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देश क्वाड (QUAD) के सदस्य हैं और स्वतंत्र एवं समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की वकालत करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर गर्व और चिंता का मिला-जुला विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत की सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सक्रिय रहते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र राष्ट्रों को यह संदेश देता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में आने वाला नहीं है।
यह परियोजना केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इन सुदूर क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति देगी। सटीक मानचित्र उपलब्ध होने से सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और संचार सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। चीन द्वारा अक्सर बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर जताई जाने वाली आपत्तियों के बीच, भारत का यह कदम उसकी आत्मनिर्भरता और रक्षात्मक तैयारी को दर्शाता है।
आने वाले समय में भारत सरकार इस तरह के मैपिंग प्रोजेक्ट्स को अन्य सीमावर्ती राज्यों में भी विस्तार दे सकती है। इस पहल से न केवल चीनी दुष्प्रचार की धार कुंद होगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की क्षेत्रीय अखंडता के दावों को डेटा-आधारित समर्थन भी प्राप्त होगा।
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