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फीफा विश्व कप से पहले सोमालियाई रेफरी उमर अब्दुलकादिर अरतान को अमेरिका में प्रवेश से रोका गया, वतन वापसी पर हुआ भव्य स्वागत

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 03:30 pm
फीफा विश्व कप से पहले सोमालियाई रेफरी उमर अब्दुलकादिर अरतान को अमेरिका में प्रवेश से रोका गया, वतन वापसी पर हुआ भव्य स्वागत

फीफा विश्व कप के लिए चुने गए पहले सोमालियाई रेफरी उमर अब्दुलकादिर अरतान को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने स्वदेश वापसी की।

सोमालिया के प्रतिष्ठित फुटबॉल रेफरी उमर अब्दुलकादिर अरतान, जो फीफा विश्व कप में अंपायरिंग करने वाले अपने देश के पहले नागरिक बनने जा रहे थे, को एक अप्रत्याशित झटके का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों द्वारा प्रवेश से इनकार किए जाने के बाद अरतान को वापस मोगादिशु लौटना पड़ा। हालांकि, इस निराशाजनक घटनाक्रम के बावजूद, जब वे स्वदेश पहुंचे, तो हजारों समर्थकों और खेल प्रेमियों ने उनका एक नायक की तरह स्वागत किया। अरतान की यह यात्रा केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए ही नहीं, बल्कि सोमालिया के खेल इतिहास के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही थी। उन्हें आगामी फीफा टूर्नामेंट के लिए रेफरी के रूप में चुना गया था, जो वैश्विक मंच पर सोमालिया की बढ़ती उपस्थिति का प्रतीक था। हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए, अरतान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि यह बाधा उनके हौसलों को कम नहीं कर सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे भविष्य के टूर्नामेंटों में सोमालिया का प्रतिनिधित्व करने और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाने के लिए समर्पित रहेंगे। यह मामला अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में आव्रजन नीतियों और समावेशिता पर एक नई बहस छेड़ चुका है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदायों, विशेषकर भारतीय और अफ्रीकी मूल के खेल प्रेमियों के लिए, यह घटना काफी प्रासंगिक है। कई बार कड़े वीजा नियमों और राजनीतिक कारणों से योग्य खिलाड़ियों और अधिकारियों को बड़े वैश्विक मंचों से वंचित रहना पड़ता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में भी क्रिकेट और अन्य खेलों के प्रति गहरा लगाव है, और खेल जगत में होने वाले ऐसे भेदभावपूर्ण अनुभव अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। सोमालियाई खेल मंत्रालय और स्थानीय फुटबॉल महासंघ ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि फीफा जैसे वैश्विक संगठनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा चुने गए अधिकारियों को मेजबान देशों द्वारा उचित सम्मान और प्रवेश संबंधी सुविधाएं मिले। अरतान के निर्वासन ने टूर्नामेंट की निष्पक्षता और 'सभी के लिए खेल' के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, अरतान को मिली जन-समर्थन की लहर यह दर्शाती है कि सोमालियाई जनता उन्हें अपना गौरव मानती है। यह घटना न केवल एक रेफरी के संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह खेल और राजनीति के जटिल संबंधों को भी उजागर करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फीफा और अमेरिकी अधिकारी इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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