ऑस्ट्रेलिया
सोलर और बैटरी रिबेट में बदलाव: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कारोबारियों के लिए क्या हैं इसके मायने?
ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 04:37 pm

ऑस्ट्रेलियाई संघीय और राज्य सरकारों द्वारा रिबेट नीतियों में किए गए हालिया बदलावों ने कमर्शियल सोलर और बैटरी स्टोरेज की वित्तीय स्थिति को बदल दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में ऊर्जा क्षेत्र की नीतियों में पिछले पखवाड़े में हुए दो बड़े बदलावों ने वाणिज्यिक और औद्योगिक (C&I) सोलर और बैटरी परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता को पूरी तरह से बदल दिया है। संघीय और राज्य स्तर पर घोषित इन नई रिबेट योजनाओं का सीधा असर उन छोटे और मध्यम व्यवसायों पर पड़ेगा, जो अपनी बढ़ती बिजली लागत को नियंत्रित करने के लिए अक्षय ऊर्जा का सहारा ले रहे हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो किराना स्टोर, वेयरहाउस, मेडिकल क्लीनिक और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है, ये बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
नवीनतम डेटा और विश्लेषण के अनुसार, सोलर पैनलों और बैटरी स्टोरेज के लिए उपलब्ध सब्सिडी संरचना में बदलाव का मतलब है कि अब निवेश पर रिटर्न (ROI) मिलने की अवधि पहले से काफी कम हो गई है। इसका मुख्य कारण न्यू साउथ वेल्स (NSW) और विक्टोरिया जैसे राज्यों में शुरू की गई नई प्रोत्साहन योजनाएं हैं, जो न केवल पैनल लगाने बल्कि ऊर्जा संचय (बैटरी) को भी बढ़ावा दे रही हैं। उदाहरण के लिए, NSW की पीक डिमांड रिडक्शन स्कीम (PDRS) अब बैटरी सिस्टम स्थापित करने वाले व्यवसायों को भारी वित्तीय लाभ प्रदान कर रही है।
भारतीय मूल के कई उद्यमी जो ऑस्ट्रेलिया में बड़े कमर्शियल परिसर चलाते हैं, उनके लिए अब 'सोलर-ओनली' मॉडल के बजाय 'सोलर प्लस बैटरी' मॉडल अधिक आकर्षक हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले बैटरी की उच्च लागत के कारण कई व्यवसायी इसे टाल देते थे, लेकिन नई रिबेट व्यवस्था के बाद, पीक आवर्स के दौरान ग्रिड पर निर्भरता कम करना अब आर्थिक रूप से समझदारी भरा कदम है। आंकड़ों से पता चलता है कि बैटरी के साथ कमर्शियल सोलर सिस्टम अब 3 से 5 साल के भीतर अपनी लागत वसूल कर सकते हैं, जो कि कुछ साल पहले तक 7-9 साल थी।
हालांकि, इन बदलावों के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। संघीय सरकार की स्मॉल-स्केल रिन्यूएबल एनर्जी स्कीम (SRES) के तहत मिलने वाले इंसेंटिव हर साल धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। इसका मतलब है कि जो व्यवसाय इस साल के अंत तक निर्णय लेंगे, उन्हें अगले साल की तुलना में बेहतर रिबेट मिलने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और थोक बिजली दरों में वृद्धि को देखते हुए, यह सही समय है कि कारोबारी अपनी ऊर्जा रणनीति पर पुनर्विचार करें।
ICN24 के लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यवसायियों को केवल शुरुआती लागत (Upfront Cost) पर ध्यान देने के बजाय दीर्घकालिक बचत का आकलन करना चाहिए। संघीय और राज्य स्तर की इन दोहरी नीतियों का लाभ उठाने के लिए यह आवश्यक है कि आप एक प्रमाणित सोलर इंस्टॉलर से परामर्श लें जो आपके राज्य की विशिष्ट रिबेट योजनाओं की गहरी समझ रखता हो। उचित योजना के साथ, ये नीतियां न केवल आपके व्यवसाय के कार्बन फुटप्रिंट को कम करेंगी, बल्कि परिचालन लागत में भी भारी कटौती सुनिश्चित करेंगी।
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