राजनीति
चंडीगढ़ में सिख यूथ का बड़ा प्रदर्शन: बंदी सिखों की रिहाई और धार्मिक मांगों को लेकर निकाला रोष मार्च
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 08:30 am

चंडीगढ़ में सिख यूथ ने विभिन्न मांगों को लेकर रोष मार्च निकाला, जिसमें 'बंदी सिखों' की रिहाई और बेअदबी के मामलों में न्याय की मांग की गई।
चंडीगढ़ में हाल ही में सिख यूथ संगठनों द्वारा एक विशाल रोष मार्च का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग करना था, जो अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेलों में बंद हैं, जिन्हें अक्सर 'बंदी सिंह' कहा जाता है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप का भी विरोध किया।
रोष मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ गुजरा, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर न्याय की मांग और धार्मिक स्वतंत्रता के नारे लिखे थे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा नेताओं ने कहा कि यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह सिख समुदाय की उन भावनाओं का प्रतीक है जिन्हें लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में 2015 के बेअदबी मामलों में शामिल दोषियों को कड़ी सजा देना और जेलों में बंद सिख कैदियों को मानवीय आधार पर रिहा करना शामिल है। उनका तर्क है कि कई कैदी दशकों से सलाखों के पीछे हैं और उन्होंने अपनी कानूनी सजा पूरी कर ली है, फिर भी उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा है।
चंडीगढ़ पुलिस ने इस मार्च के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। हालांकि मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसने पंजाब और हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर से धार्मिक और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को गरमा दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिख डायस्पोरा के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले पंजाबी समुदाय के लोग अक्सर पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक हलचलों पर करीब से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी समय-समय पर मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर इस तरह की चर्चाएं और छोटे स्तर पर प्रदर्शन देखे जाते रहे हैं।
प्रदर्शन के अंत में, आयोजकों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान इन जटिल सामाजिक-धार्मिक मुद्दों की ओर आकर्षित किया है।
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