राजनीति
सिद्धिविनायक मंदिर सौंदर्यीकरण परियोजना का विरोध: स्थानीय निवासियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 02:37 pm

मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण परियोजना को लेकर स्थानीय निवासियों और बीएमसी के बीच विवाद गहरा गया है।
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के आसपास बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा प्रस्तावित सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण परियोजना विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने इस योजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे एक व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। यह विरोध प्रदर्शन उस समय सामने आया है जब नगर निकाय मंदिर के आसपास के क्षेत्र को आधुनिक बनाने और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की योजना बना रहा है।
बीएमसी की इस प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर के आसपास की सड़कों का चौड़ीकरण, पैदल चलने वालों के लिए बेहतर फुटपाथ और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। हालांकि, स्थानीय निवासियों का तर्क है कि इस परियोजना के कार्यान्वयन से क्षेत्र की मूल पहचान प्रभावित होगी और कई छोटे व्यापारियों के रोजगार पर संकट आ जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले स्थानीय हितधारकों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया है।
प्रभादेवी के निवासियों के अनुसार, मंदिर के आसपास की सड़कों पर पहले से ही यातायात का भारी दबाव रहता है। नवीनीकरण के नाम पर किए जाने वाले निर्माण कार्यों से न केवल रोजमर्रा की आवाजाही बाधित होगी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए भी रास्ता मिलना मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय रहवासी संघों का आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर स्थानीय निवासियों की सुविधा की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जो स्थानीय समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखे।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मुंबई से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह मंदिर गहरी आस्था का केंद्र है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई जब भी भारत यात्रा पर जाते हैं, सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करना उनकी प्राथमिकता होती है। ऐसे में मंदिर परिसर में होने वाला कोई भी बदलाव वैश्विक स्तर पर रहने वाले भक्तों को प्रभावित करता है। सोशल मीडिया के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया में बसे मुंबईकर भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिनका मानना है कि मंदिर की आध्यात्मिकता और स्थानीय विरासत के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल, स्थानीय निवासियों ने नगर निगम को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। यदि बीएमसी प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो उन्होंने आने वाले दिनों में मंदिर के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और धरना देने की घोषणा की है। इस स्थिति ने प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि एक तरफ पर्यटन और सुरक्षा के लिहाज से विकास जरूरी है, तो दूसरी तरफ स्थानीय जनता का तीव्र आक्रोश है। बीएमसी के अधिकारियों ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे निवासियों के साथ बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं।
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