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SSF जॉइनिंग से 10 दिन पहले शामली के युवक की हत्या: पत्नी को परीक्षा दिलाने सहारनपुर गया था शिवा, साले ने सरेआम मारी गोली
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 12:30 pm
शामली में प्रेम विवाह से नाराज साले ने अपने जीजा शिवा की गोली मारकर हत्या कर दी। शिवा 10 दिन बाद एसएसएफ जॉइन करने वाला था।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां प्रेम विवाह और पारिवारिक प्रतिष्ठा के नाम पर एक होनहार युवक की जान ले ली गई। शामली के खेड़ी बैरागी गांव के रहने वाले 24 वर्षीय शिवा की उसके साले ने सहारनपुर में गोली मारकर हत्या कर दी। यह दुखद घटना उस समय हुई जब शिवा अपनी पत्नी आकांक्षा को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा दिलाने ले गया था। शिवा का चयन हाल ही में स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) में हुआ था और मात्र 10 दिनों बाद उसे जॉइन करना था।
शिवा और आकांक्षा की प्रेम कहानी स्कूल के दिनों से शुरू हुई थी। दोनों नौवीं कक्षा से एक-दूसरे को जानते थे और साथ ही कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। हालांकि दोनों एक ही समुदाय से थे, लेकिन उनके परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। विरोध के बावजूद दोनों ने करीब डेढ़ साल पहले घर से भागकर शादी कर ली थी। शादी के बाद वे कुछ समय बाहर रहे और चार महीने पहले ही इस उम्मीद में गांव लौटे थे कि समय के साथ परिवार की नाराजगी खत्म हो जाएगी।
मंगलवार को शिवा अपनी पत्नी को परीक्षा केंद्र छोड़ने सहारनपुर गया था। आरोप है कि रास्ते में आकांक्षा के भाई मनजीत ने उन्हें घेर लिया और शिवा की कनपटी पर गोली मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आकांक्षा ने अपने लहूलुहान पति का सिर गोद में रखा और मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन शिवा ने उसकी आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपी और उसका परिवार गांव छोड़कर फरार है।
शिवा एलएलबी अंतिम वर्ष का छात्र था और अपने पिता की परचून की दुकान में हाथ भी बंटाता था। उसकी सरकारी नौकरी का जॉइनिंग लेटर घर आ चुका था, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन इस हत्या ने सब कुछ उजाड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
यह घटना एक बार फिर भारतीय समाज में 'ऑनर किलिंग' और अंतर-पारिवारिक संघर्षों की गहरी जड़ों को उजागर करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी ऐसी खबरें चिंताजनक हैं, क्योंकि वहां भी प्रवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आधुनिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करता रहा है। शामली का यह मामला कानून-व्यवस्था और सामाजिक सोच, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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