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'कॉकटेल 2' को मिले 'A' सर्टिफिकेट से शाहिद कपूर हैरान, सेंसर बोर्ड के फैसले पर उठाए सवाल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:42 pm
शाहिद कपूर ने अपनी हालिया फिल्म 'कॉकटेल 2' को वयस्क रेटिंग दिए जाने पर असहमति जताई है, उनका मानना है कि फिल्म की कहानी आधुनिक परिवारों के लिए प्रासंगिक है।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहिद कपूर ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'कॉकटेल 2' को सेंसर बोर्ड द्वारा 'ए' (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट दिए जाने पर गहरी हैरानी और असहमति व्यक्त की है। 19 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म को लेकर शाहिद का मानना है कि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे आज का युवा या परिवार एक साथ न देख सकें। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के इस फैसले ने फिल्म की टीम और प्रशंसकों दोनों को सोच में डाल दिया है। अभिनेता ने तर्क दिया कि फिल्म का उद्देश्य समाज के एक खास हिस्से की सच्चाई को दिखाना था, न कि केवल सनसनी फैलाना।
'कॉकटेल 2' साल 2012 की सुपरहिट फिल्म 'कॉकटेल' का सीक्वल है, जिसमें इस बार शाहिद कपूर एक नई और जटिल भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म आधुनिक रिश्तों, शहरी जीवन की उलझनों और मानवीय भावनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। शाहिद का तर्क है कि जब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इससे कहीं अधिक बोल्ड और स्पष्ट सामग्री बिना किसी खास पाबंदी के उपलब्ध है, तो सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों पर इतने कड़े प्रतिबंध क्यों लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म की पटकथा आज के दौर की हकीकत को दर्शाती है और इसे व्यापक दर्शकों तक पहुंचना चाहिए था।
इस मुद्दे का प्रभाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय पर भी इसका व्यापक असर पड़ता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर सप्ताहांत पर अपने पूरे परिवार के साथ बॉलीवुड फिल्में देखना पसंद करते हैं। ऑस्ट्रेलिया का 'क्लासिफिकेशन बोर्ड' अक्सर भारतीय फिल्मों को अपनी स्थानीय रेटिंग प्रणाली के तहत परखता है, लेकिन भारत में मिली 'ए' रेटिंग का प्रचार अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिवारिक दर्शकों को सिनेमाघरों से दूर कर देता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों के लिए, जो अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए सिनेमा का सहारा लेते हैं, रेटिंग का यह कड़ा रुख फिल्म देखने के उनके निर्णय को प्रभावित करता है।
अपनी बात रखते हुए शाहिद ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में दर्शकों की समझ और परिपक्वता में काफी बदलाव आया है। आज का युवा विश्व सिनेमा से जुड़ा हुआ है और वह विभिन्न प्रकार की जटिल कहानियों को समझने में सक्षम है। अभिनेता के अनुसार, फिल्म में दिखाए गए कुछ 'बोल्ड' दृश्य कहानी की मांग थे और उन्हें फिल्म के प्रवाह को बनाए रखने के लिए शामिल किया गया था। सेंसर बोर्ड के इस पारंपरिक रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि रेटिंग प्रणाली में सुधार किया जाए ताकि यह वैश्विक मानकों और आज के समय के अनुरूप हो सके।
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि 'ए' रेटिंग मिलने से किसी भी फिल्म की कमाई में 20 से 30 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है, क्योंकि यह किशोरों और पूर्ण पारिवारिक दर्शकों को पूरी तरह से बाहर कर देती है। 'कॉकटेल 2' के साथ भी यही चुनौती बनी हुई है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा युवा दर्शकों पर केंद्रित है। फिलहाल फिल्म सिनेमाघरों में चल रही है और शाहिद के इस बेबाक बयान ने मनोरंजन जगत में सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में, जहां फिल्म का वितरण व्यापक है, यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक शाहिद के इस नजरिए से कितना सहमत होते हैं और क्या यह विवाद फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता में मददगार साबित होगा।
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