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भारतीय शेयर बाजार: लंबी अवधि के डेरिवेटिव्स पेश करने की तैयारी में सेबी, निवेशकों को मिलेगा नया विकल्प
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 06:09 am
सेबी साप्ताहिक और मासिक एक्सपायरी से आगे बढ़कर लंबी अवधि के इक्विटी डेरिवेटिव्स लाने पर विचार कर रहा है, जिससे बाजार में स्थिरता और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) देश के पूंजी बाजार में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। नियामक अब साप्ताहिक और मासिक कॉन्ट्रैक्ट्स की मौजूदा सीमा से आगे बढ़कर लंबी अवधि के इक्विटी डेरिवेटिव्स (Long-term Equity Derivatives) पेश करने की संभावनाओं का पता लगा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाजार में सट्टेबाजी को कम करना और वास्तविक जोखिम प्रबंधन (Risk Management) को बढ़ावा देना है।
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान, अधिकारियों ने संकेत दिया कि सरकार और सेबी मिलकर बाजार के उन अवरोधों का विश्लेषण कर रहे हैं जो लंबी अवधि के डेरिवेटिव्स की राह में बाधा बन रहे हैं। वर्तमान में, भारतीय वायदा और विकल्प (F&O) बाजार मुख्य रूप से साप्ताहिक और मासिक एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिका हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) पैदा होता है, जिसका सबसे अधिक नुकसान छोटे और खुदरा निवेशकों को उठाना पड़ता है।
इस कदम का सबसे बड़ा लाभ उन संस्थागत निवेशकों और गंभीर ट्रेडर्स को होगा जो अपने पोर्टफोलियो को लंबी अवधि के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं। लंबी अवधि के डेरिवेटिव्स से निवेशकों को तीन महीने से लेकर एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए हेजिंग (Hedging) करने की सुविधा मिलेगी। इससे भारतीय शेयर बाजार की संरचना अधिक परिपक्व होगी और यह वैश्विक मानकों के करीब पहुंचेगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय पेशेवर और कारोबारी सीधे तौर पर या पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करते हैं। लंबी अवधि के डेरिवेटिव्स उपलब्ध होने से, ऑस्ट्रेलिया स्थित निवेशकों को अपनी भारतीय संपत्तियों के मुद्रा जोखिम और बाजार जोखिम को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी। यह उन एनआरआई निवेशकों के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करेगा जो भारतीय बाजार की दीर्घकालिक विकास गाथा का हिस्सा बनना चाहते हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि साप्ताहिक एक्सपायरी ने बाजार में एक 'जुआ संस्कृति' को बढ़ावा दिया है, जहां लोग कम समय में अधिक मुनाफे के चक्कर में अपनी पूंजी गंवा देते हैं। सेबी का यह नया रुख बाजार की तरलता (Liquidity) को अधिक स्थिर कॉन्ट्रैक्ट्स की ओर मोड़ने का प्रयास है। आने वाले समय में, सेबी बाजार के विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए नियमों से बाजार की गहराई बढ़े और निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो।
अंततः, इस सुधार का उद्देश्य भारतीय इक्विटी बाजार को केवल ट्रेडिंग का अड्डा बनाने के बजाय एक मजबूत निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। सेबी की यह योजना न केवल घरेलू निवेशकों बल्कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भी भारत को एक आकर्षक बाजार बनाएगी।
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