राजनीति
सावन रुद्राभिषेक: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किस द्रव्य का करें प्रयोग? जानें जल से लेकर सरसों तेल तक का महत्व
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 01:37 pm

सावन के पावन महीने में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। जानें किस मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव का किस सामग्री से अभिषेक करना चाहिए और क्या है इनका धार्मिक आधार।
हिंदू धर्म में सावन के महीने को बेहद पवित्र माना जाता है, जो पूरी तरह से भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। इस महीने में शिव भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान करते हैं, जिनमें 'रुद्राभिषेक' का स्थान सर्वोपरि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में रुद्राभिषेक करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्टों का निवारण होता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इस समय का विशेष महत्व है, जहां सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों के मंदिरों में सावन की रौनक देखने को मिलती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रुद्राभिषेक में प्रयुक्त होने वाले प्रत्येक द्रव्य (तरल पदार्थ) का अपना एक विशिष्ट महत्व और फल होता है। श्रद्धालु अपनी विशेष इच्छाओं के अनुसार इन द्रव्यों का चयन करते हैं। सबसे प्रचलित 'जलाभिषेक' है। शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करने को मानसिक शांति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना गया है। यदि कोई व्यक्ति पारिवारिक कलह से जूझ रहा है या मन की शांति चाहता है, तो उसे शीतल जल से महादेव का अभिषेक करना चाहिए।
दूध से अभिषेक करने का भी गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक अर्थ है। माना जाता है कि गाय के कच्चे दूध से रुद्राभिषेक करने पर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है और संतान सुख की बाधाएं दूर होती हैं। दीर्घायु और बेहतर स्वास्थ्य की कामना करने वाले भक्तों के लिए दुग्धाभिषेक को सर्वोत्तम बताया गया है। वहीं, आर्थिक समृद्धि और ऐश्वर्य की चाह रखने वालों के लिए गन्ने के रस (इक्षु रस) से अभिषेक करने का विधान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गन्ने के रस से शिव का अभिषेक करने से दरिद्रता का नाश होता है और घर में लक्ष्मी का वास होता है।
शत्रु बाधा और कानूनी अड़चनों से मुक्ति के लिए सरसों के तेल से रुद्राभिषेक किया जाता है। हालांकि, यह अभिषेक विशेष परिस्थितियों में और योग्य पुरोहितों के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए। मान्यता है कि सरसों के तेल की धारा से महादेव प्रसन्न होकर साधक के शत्रुओं का दमन करते हैं और उसे विजय का आशीर्वाद देते हैं। इसके अतिरिक्त, शहद से अभिषेक करने पर समाज में मान-सम्मान और वाणी में मधुरता आती है, जबकि घी से अभिषेक करने पर वंश वृद्धि होती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए, काम की व्यस्तता और भौगोलिक दूरी के बावजूद सावन का उत्साह कम नहीं होता। स्थानीय मंदिरों, जैसे सिडनी के श्री शिव मंदिर (मिंटो) या मेलबर्न के शिव विष्णु मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक सत्र आयोजित किए जाते हैं। जो लोग मंदिर नहीं जा पाते, वे घर पर ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर इन द्रव्यों से संक्षिप्त अभिषेक कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। जानकारों का कहना है कि द्रव्य चाहे जो भी हो, महादेव केवल भक्त के भाव और अटूट विश्वास के भूखे होते हैं।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
4000 किमी तक वार और परमाणु हमला: भारत ने किया अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने ओडिशा के चांदीपुर से परमाणु सक्षम अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसकी मारक क्षमता 4000 किलोमीटर तक है।
7 अग॰ 2026, 02:37 pm

राजनीति
ओडिशा: युवाओं को जागरूक करने के लिए 'चुनावी साक्षरता क्लब' को सक्रिय करने के निर्देश
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को चुनावी साक्षरता क्लबों को पुनर्जीवित करने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
7 अग॰ 2026, 12:37 pm

राजनीति
"आरक्षण पर डॉ. अंबेडकर की सलाह मानें तो कोई विवाद नहीं": मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता पर दिया जोर
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यदि समाज डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आरक्षण संबंधी सुझावों का पालन करे, तो कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने समर्थ वर्गों से लाभ दूसरों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
7 अग॰ 2026, 11:38 am
