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एसएईएल (SAEL) ने राजस्थान के भादरा में शुरू किया अपना 11वां एग्री-वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 10:00 pm
एसएईएल (SAEL) ने राजस्थान के भादरा में शुरू किया अपना 11वां एग्री-वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एसएईएल ने राजस्थान के भादरा में 14.9 मेगावाट क्षमता का अपना 11वां कृषि अपशिष्ट बिजली संयंत्र शुरू किया है।

भारत की अग्रणी अक्षय ऊर्जा कंपनी एसएईएल (SAEL) इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा में अपने 11वें कृषि अपशिष्ट-से-ऊर्जा (Agri-Waste to Energy) संयंत्र के सफल संचालन की घोषणा की है। यह परियोजना कंपनी की सहायक इकाई वीसीए पावर प्राइवेट लिमिटेड (VCA Power Private Limited) के माध्यम से क्रियान्वित की गई है। 14.9 मेगावाट क्षमता वाला यह नया संयंत्र कृषि अवशेषों का उपयोग करके स्वच्छ बिजली पैदा करेगा, जो न केवल ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। यह संयंत्र मुख्य रूप से स्थानीय किसानों से प्राप्त पराली और अन्य कृषि अवशेषों को ईंधन के रूप में उपयोग करेगा। उत्तर भारत में पराली जलाना एक गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, ऐसे में यह परियोजना किसानों को उनके कृषि अपशिष्ट के बदले अतिरिक्त आय प्रदान करेगी और जहरीले धुएं से मुक्ति दिलाने में मदद करेगी। एसएईएल का लक्ष्य स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे से कंचन बनाने की सरकार की पहल को आगे बढ़ाना है। तकनीकी दृष्टिकोण से, यह संयंत्र अत्याधुनिक दहन तकनीक का उपयोग करता है जो न्यूनतम उत्सर्जन के साथ अधिकतम ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करता है। राजस्थान में इस तरह के बुनियादी ढांचे का विकास राज्य की सौर ऊर्जा प्रधान छवि में जैव-ऊर्जा (Bio-energy) के नए आयाम जोड़ रहा है। कंपनी ने संकेत दिया है कि यह विस्तार उनकी बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे भारत में अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो को और मजबूत करना चाहते हैं। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत की यह पहल महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो कृषि और स्वच्छ ऊर्जा निवेश से जुड़े हैं, भारत के इस हरित परिवर्तन को बारीकी से देख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हाल के वर्षों में अक्षय ऊर्जा और स्थिरता को लेकर कई द्विपक्षीय समझौते हुए हैं। सिडनी और मेलबर्न में स्थित ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि एसएईएल जैसे मॉडल को अन्य देशों में भी दोहराया जा सकता है जहाँ कृषि अवशेषों का प्रबंधन एक चुनौती है। एसएईएल इंडस्ट्रीज के इस कदम की उद्योग विशेषज्ञों ने सराहना की है। उनका मानना है कि इस तरह के विकेंद्रीकृत बिजली संयंत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। यह न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करता है, बल्कि ग्रिड की स्थिरता में भी सुधार करता है। कंपनी भविष्य में और भी अधिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है, जो भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम है।
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