राजनीति
शिक्षा का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से मांगा जवाब, RTE के खराब कार्यान्वयन पर जताई चिंता
ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 01:31 am

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के लिए आरक्षित 25% सीटों के खराब प्रबंधन पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
भारत के उच्चतम न्यायालय ने पंजाब राज्य में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के कथित खराब कार्यान्वयन को लेकर केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए अनिवार्य 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधानों का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है।
यह मामला भारत की शिक्षा व्यवस्था की उस बुनियादी खामी को उजागर करता है, जिस पर अक्सर मानवाधिकार कार्यकर्ता सवाल उठाते रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि वह पंजाब सरकार को RTE अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करने का निर्देश दे। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रवेश प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी है और कई योग्य बच्चे निजी स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त शिक्षा के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और पंजाब राज्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या राज्य सरकार ने उन निजी स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है जो EWS कोटे के तहत छात्रों को प्रवेश देने से इनकार करते हैं। RTE अधिनियम के तहत, 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें निजी संस्थानों में सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए सीटें आरक्षित करना शामिल है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रवासी भारतीय अक्सर पंजाब में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में निवेश और सहयोग करते हैं। पंजाब से ताल्लुक रखने वाले कई एनआरआई (NRI) अपने पैतृक गांवों में सरकारी और निजी स्कूलों की स्थिति को लेकर चिंतित रहते हैं। इस तरह के कानूनी हस्तक्षेप से पंजाब की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उन बच्चों को लाभ मिलेगा जो संसाधनों के अभाव में बेहतर शिक्षा नहीं पा पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सख्त रुख अपनाता है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बनेगा। वर्तमान में, कई राज्यों में RTE सीटों की प्रतिपूर्ति (reimbursement) को लेकर निजी स्कूलों और सरकार के बीच विवाद चलता रहता है, जिसका सीधा असर गरीब बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। पंजाब में इस कानून के सख्ती से लागू होने पर हजारों वंचित परिवारों को राहत मिल सकती है।
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