राजनीति
'देश का हो सम्मान': सिया सचदेव ने भारतीयों और प्रवासी समुदाय से की राष्ट्रीय गौरव बनाए रखने की अपील
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 04:37 pm

सिया सचदेव ने राष्ट्रीय गरिमा और सामुदायिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए भारतीयों, विशेषकर प्रवासी समुदाय से देश का मान बढ़ाने का आह्वान किया है।
हाल ही में सिया सचदेव ने 'देश का हो सम्मान' के अपने आह्वान के माध्यम से भारतीय नागरिकों और दुनिया भर में फैले प्रवासी भारतीयों के बीच एक नई चेतना जगाने का प्रयास किया है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक पटल पर एक नई शक्ति के रूप में उभर रहा है और विदेशों में रहने वाला भारतीय समुदाय देश की छवि को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सचदेव का मानना है कि राष्ट्र का सम्मान केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक के आचरण, उसकी नैतिकता और अपनी संस्कृति के प्रति उसके जुड़ाव पर निर्भर करता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लगभग दस लाख भारतीय प्रवासियों के लिए यह आह्वान विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में भारतीय समुदाय न केवल ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, बल्कि वहां की बहुसांस्कृतिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा भी बन गया है। सिया सचदेव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवासी भारतीय 'सॉफ्ट पावर' के सबसे बड़े वाहक हैं। जब एक भारतीय विदेश में उत्कृष्ट कार्य करता है या ईमानदारी का परिचय देता है, तो उससे पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊँचा होता है। उन्होंने युवाओं से विशेष अपील की है कि वे आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी जड़ों को न भूलें।
सचदेव ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि 'देश का सम्मान' करने का अर्थ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने कहा कि चाहे वह पर्यावरण संरक्षण हो, शिक्षा का प्रसार हो या फिर जरूरतमंदों की मदद, हमारे छोटे-छोटे प्रयास राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में, जहां भारतीय छात्र और पेशेवर बड़ी संख्या में हैं, वहां उनकी सफलता और उनका व्यवहार भारत की वैश्विक छवि को निर्धारित करता है। सचदेव के अनुसार, देशभक्ति केवल नारों में नहीं, बल्कि हमारे कार्यों में झलकनी चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सचदेव के इस संदेश को सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आह्वान समुदायों को एकजुट करने का काम करते हैं। ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंधों के परिप्रेक्ष्य में, यह साझा मूल्यों और आपसी सम्मान की नींव को और मजबूत करता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के नेताओं ने भी इस विचार का समर्थन किया है, उनका कहना है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करना हमें एक बेहतर नागरिक बनाता है।
अंत में, सिया सचदेव का यह संदेश एक अनुस्मारक है कि राष्ट्र की प्रतिष्ठा सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि वे अपने दैनिक जीवन में ऐसे निर्णय लें जो भारत के गौरव को बढ़ाएं। 'देश का हो सम्मान' केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन होना चाहिए जो हर भारतीय को, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हो, अपने देश के प्रति उत्तरदायी बनाए रखे।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
कर्नाटक: सरकारी परिसरों में कार्यक्रमों के लिए अनुमति अनिवार्य, RSS की शाखाओं को लेकर छिड़ा नया सियासी विवाद
कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी संपत्तियों के उपयोग को लेकर नया बिल मंजूर किया है, जिस पर बीजेपी ने आरएसएस को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
14 अग॰ 2026, 05:37 pm

राजनीति
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: प्रधानमंत्री मोदी ने 1947 के पीड़ितों के साहस और बलिदान को किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई और विस्थापन का दंश झेला।
14 अग॰ 2026, 03:37 pm

राजनीति
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- 'एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर 1947 के बंटवारे के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और देशवासियों से एकजुटता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
14 अग॰ 2026, 02:37 pm
