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ट्रम्प द्वारा खुफिया प्रमुख के चयन पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर विरोध तेज

ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 05:30 am
ट्रम्प द्वारा खुफिया प्रमुख के चयन पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर विरोध तेज

डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बिल पुल्ते को कार्यवाहक खुफिया प्रमुख नियुक्त करने पर रिपब्लिकन पार्टी में विरोध शुरू हो गया है, जिससे सुरक्षा अनुभव पर सवाल उठ रहे हैं।

वाशिंगटन: नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बिल पुल्ते को कार्यवाहक खुफिया प्रमुख (Intelligence Chief) नियुक्त किए जाने के फैसले पर उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर तेज हो गए हैं। बुधवार को ट्रम्प कैबिनेट के दो प्रमुख सदस्यों ने इस फैसले से खुद को अलग कर लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासन के भीतर इस नियुक्ति को लेकर गहरे मतभेद हैं। आलोचना का मुख्य केंद्र बिल पुल्ते के पास राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया मामलों के अनुभव की भारी कमी है। पुल्ते, जो मुख्य रूप से एक बंधक नियामक (Mortgage Regulator) के रूप में जाने जाते हैं, के पास अमेरिकी खुफिया तंत्र की 18 विभिन्न एजेंसियों के जटिल संचालन का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच, इस तरह के संवेदनशील पद पर किसी अनुभवी व्यक्ति का होना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति का असर न केवल अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि इसके वैश्विक सहयोगियों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र पर भी असर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे 'फाइव आइज' (Five Eyes) गठबंधन के सदस्यों के लिए यह घटनाक्रम विशेष चिंता का विषय है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा और सुरक्षा संबंधों के संदर्भ में, अमेरिकी खुफिया नेतृत्व में किसी भी प्रकार की अस्थिरता या अनुभवहीनता का असर क्वाड (QUAD) जैसे समूहों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। रिपब्लिकन सांसदों ने सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के 'वफादार' लोगों की नियुक्ति से खुफिया एजेंसियों का राजनीतिकरण हो सकता है। इससे पहले भी ट्रम्प पर अपनी पसंद के लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार विरोध उनके अपने खेमे से आ रहा है। सीनेट के कई सदस्यों ने संकेत दिया है कि वे इस नियुक्ति का समर्थन करने में सहज नहीं हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अमेरिका के खुफिया नेतृत्व में किसी भी तरह का बदलाव प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा नीति को प्रभावित करता है, जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के साझा हित हैं। यदि अमेरिका की खुफिया नीतियों में अस्थिरता आती है, तो इसका सीधा प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रम्प की टीम ने इन आलोचनाओं का बचाव करते हुए कहा है कि पुल्ते एक कुशल प्रशासक हैं और वे व्यवस्था में जरूरी सुधार लाएंगे। हालांकि, आने वाले दिनों में सीनेट में होने वाली सुनवाई और पार्टी के भीतर बढ़ता विरोध इस नियुक्ति की राह मुश्किल बना सकता है।
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