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ग्रीन कार्ड आवेदकों को बड़ी राहत: सख्त आव्रजन नीति पर ट्रंप प्रशासन के रुख में नरमी

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 09:30 am
ग्रीन कार्ड आवेदकों को बड़ी राहत: सख्त आव्रजन नीति पर ट्रंप प्रशासन के रुख में नरमी

अमेरिका में ग्रीन कार्ड आवेदकों को बड़ी राहत मिली है। ट्रंप प्रशासन ने उस प्रस्तावित नीति पर कदम पीछे खींच लिए हैं, जिससे हजारों कुशल पेशेवरों को देश छोड़ने का खतरा था।

वाशिंगटन और कैनबरा के बीच आव्रजन नीतियों को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच, अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए राहत भरी खबर आई है। ट्रंप प्रशासन ने उस विवादास्पद आव्रजन नीति पर अपने कड़े रुख में नरमी दिखाई है, जिसके तहत ग्रीन कार्ड के कई आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान अमेरिका छोड़कर अपने देश से आवेदन करने के लिए मजबूर किया जा सकता था। व्यापार जगत के दिग्गजों और तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के कड़े विरोध के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि रोजगार-आधारित वीजा धारकों पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्किल्ड माइग्रेशन यानी कुशल प्रवासन को लेकर नियम सख्त किए जा रहे हैं। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य आव्रजन प्रवर्तन को कड़ा करना था, लेकिन इससे 'एच-1बी' वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीयों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया था। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई हालिया चर्चाओं में प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश रोजगार-आधारित आवेदकों की वर्तमान स्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे उनके निर्वासन का खतरा टल गया है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर काफी मायने रखती है। चूंकि कई भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों देशों के बीच करियर की संभावनाओं को देखते हैं, इसलिए अमेरिकी नीतियों में आने वाला कोई भी बदलाव वैश्विक प्रतिभा प्रवाह को प्रभावित करता है। मेलबर्न स्थित आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस नरमी से ऑस्ट्रेलिया में भी 'स्किल्ड माइग्रेशन' की चर्चाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि दोनों देश अक्सर एक-दूसरे की आव्रजन नीतियों का बारीकी से अवलोकन करते हैं। व्यापारिक समुदायों का तर्क है कि इस तरह की सख्त नीतियों से न केवल नवाचार (innovation) प्रभावित होता है, बल्कि कंपनियों के लिए अपनी वैश्विक प्रतिभा को बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि प्रशासन ने अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं, लेकिन इस आश्वासन ने फिलहाल के लिए आशंकाओं को शांत कर दिया है। हजारों कुशल कर्मचारी अब अपनी रेजिडेंसी (स्थायी निवास) की प्रक्रिया को बिना किसी तत्काल डर के जारी रख सकते हैं। आने वाले महीनों में इस नीति पर और अधिक स्पष्टता की उम्मीद है। फिलहाल, भारतीय प्रवासियों और उनके नियोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है। तनावपूर्ण माहौल के बीच व्यापारिक हितों और सरकारी प्रवर्तन के बीच का यह संतुलन अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आईसीएन24 (ICN24) इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा ताकि भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को अंतरराष्ट्रीय आव्रजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी समय पर मिल सके।
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