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रिलायंस में उत्तराधिकार प्रक्रिया अंतिम चरण में, मुकेश अंबानी ने बच्चों को सौंपी दैनिक प्रबंधन की कमान
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:53 am

रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी ने पुष्टि की है कि कंपनी में उत्तराधिकार की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और उनके तीनों बच्चों ने दैनिक कार्यों की कमान संभाल ली है।
भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के भविष्य को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए समूह के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कहा है कि कंपनी में उत्तराधिकार की योजना अब अपने अंतिम चरण में है। अंबानी के अनुसार, उनके तीनों बच्चों—आकाश, ईशा और अनंत—ने समूह के विभिन्न व्यवसायों में दैनिक प्रबंधन और परिचालन की जिम्मेदारियां पूरी तरह से संभाल ली हैं। यह घोषणा मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान की गई, जिसे भारतीय कॉरपोरेट जगत में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया कि रिलायंस अब एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है, जहाँ युवा नेतृत्व कंपनी को अगली पीढ़ी की तकनीकों और वैश्विक विस्तार की ओर ले जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराधिकार की यह प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है, ताकि कंपनी की स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को बनाए रखा जा सके। अंबानी ने कहा कि वह स्वयं अब एक मार्गदर्शक और 'मेंटर' की भूमिका में रहेंगे, जो रणनीतिक निर्णय लेने में युवा नेतृत्व की सहायता करेंगे।
नेतृत्व के विभाजन की बात करें तो आकाश अंबानी पहले से ही रिलायंस जियो (डिजिटल और टेलीकॉम) के अध्यक्ष के रूप में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। ईशा अंबानी रिलायंस रिटेल के विस्तार और विकास का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी ऊर्जा और विशेष रूप से 'ग्रीन एनर्जी' क्षेत्र में कंपनी की भविष्य की योजनाओं को आकार दे रहे हैं। अंबानी ने विश्वास जताया कि उनके तीनों बच्चे रिलायंस के संस्थापकों द्वारा स्थापित मूल्यों और व्यावसायिक नैतिकता को आगे ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुकेश अंबानी द्वारा उठाया गया यह कदम भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण उत्तराधिकारों में से एक है। अतीत में अंबानी परिवार के भीतर हुए विवादों को देखते हुए, इस बार मुकेश अंबानी ने बहुत पहले ही एक स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप तैयार किया था। यह न केवल रिलायंस के लिए बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिलायंस का प्रदर्शन सीधे तौर पर शेयर बाजार और विदेशी निवेश को प्रभावित करता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के निवेशकों और व्यापारिक समुदाय के लिए भी यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। रिलायंस न केवल भारत में एक औद्योगिक दिग्गज है, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में गहरी पैठ है। ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड और व्यक्तिगत निवेशक भी रिलायंस जैसी स्थिर और विकासोन्मुखी कंपनियों में रुचि रखते हैं। नेतृत्व का यह स्पष्ट परिवर्तन भविष्य में कंपनी के साथ होने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौतों और निवेश नीतियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
अंत में, अंबानी ने अपनी दूरदर्शिता साझा करते हुए कहा कि रिलायंस अब केवल एक पारंपरिक पेट्रोकेमिकल कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक डेटा-संचालित, तकनीक-आधारित और स्वच्छ ऊर्जा पर केंद्रित वैश्विक संस्थान बन गई है। रिलायंस की यह नई पीढ़ी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डीप टेक और सस्टेनेबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
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