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गिनी-बिसाऊ में एमपॉक्स का पहला प्रकोप: आधे से अधिक संदिग्ध मरीज बच्चे, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
ICN24 Newsroom 21 अग॰ 2026, 04:37 am
गिनी-बिसाऊ ने देश में एमपॉक्स के पहले प्रकोप की पुष्टि की है, जिसमें बच्चों की संख्या चिंताजनक है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते खतरे के बीच सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ ने अपने पहले एमपॉक्स (Mpox) प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस वायरस के संदिग्ध मामलों में से आधे से अधिक बच्चे हैं। यह खबर ऐसे समय में आई है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही एमपॉक्स को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर चुका है। गिनी-बिसाऊ में एमपॉक्स का प्रवेश अफ्रीका के उन क्षेत्रों में इस बीमारी के प्रसार को दर्शाता है जहां पहले इसके मामले नहीं देखे गए थे।
एमपॉक्स, जिसे पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था, एक वायरल ज़ूनोटिक बीमारी है। यह उसी वायरस परिवार (ऑर्थोपॉक्सवायरस) से संबंधित है जिससे चेचक (स्मॉलपॉक्स) फैलता है। यह वायरस मुख्य रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता है, लेकिन अब मानव-से-मानव संक्रमण भी काफी आम हो गया है। गिनी-बिसाऊ के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित बच्चों की संख्या चिंता का विषय है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली वयस्कों की तुलना में कम विकसित होती है और वे शारीरिक संपर्क के माध्यम से आसानी से संक्रमित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एमपॉक्स के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर दाने या छाले शामिल हैं, जो बाद में घाव का रूप ले लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के कारण इस तरह के संक्रमण तेजी से एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुँच सकते हैं। विशेष रूप से वे परिवार जो अक्सर भारत या अन्य देशों की यात्रा करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य विभाग पहले ही देश में एमपॉक्स के क्लैड II (Clade II) स्ट्रेन के मामलों की निगरानी कर रहा है। हालांकि, अफ्रीका में फैल रहा नया स्ट्रेन (Clade Ib) अधिक संक्रामक और घातक माना जा रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। गिनी-बिसाऊ की स्थिति पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं ताकि इसके प्रसार को रोका जा सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बच्चों में संक्रमण दर अधिक होने का एक कारण स्कूलों और खेल के मैदानों में निकट संपर्क हो सकता है। सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण और जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर रही है। आने वाले हफ्तों में गिनी-बिसाऊ में परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा ताकि सटीक मामलों की पहचान की जा सके और समय पर उपचार शुरू किया जा सके।
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