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राज्यसभा चुनाव: मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा समेत 23 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, भाजपा को दो सीटों का फायदा

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 07:00 pm
राज्यसभा चुनाव: मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा समेत 23 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, भाजपा को दो सीटों का फायदा

12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में 23 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा ने भी जीत दर्ज की है।

भारत के संसदीय लोकतंत्र के उच्च सदन, राज्यसभा के लिए हुए हालिया चुनावों में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 12 राज्यों की कुल 26 रिक्त सीटों में से 23 सीटों पर उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध संपन्न हो गया है। निर्वाचित होने वाले प्रमुख चेहरों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा शामिल हैं। यह चुनाव प्रक्रिया आगामी 18 जून को शेष तीन सीटों पर होने वाले मतदान से पहले पूरी हुई है। निर्वाचित हुए 23 उम्मीदवारों के राजनीतिक समीकरणों पर गौर करें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को संख्या बल में लाभ होता दिख रहा है। इन सीटों में से 12 पर भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 5 सीटें आई हैं। अन्य विजयी उम्मीदवारों में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से 3, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से 1, नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) से 1 और जनसेना पार्टी से 1 उम्मीदवार शामिल है। इस चुनाव परिणाम के साथ भाजपा को सदन में दो अतिरिक्त सीटों का शुद्ध लाभ हुआ है। क्षेत्रीय विवरण के अनुसार, मध्य प्रदेश में खाली हुई तीन सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस के हिस्से में गई है। वहीं गुजरात की चार सीटों पर भी राजनीतिक समीकरण स्पष्ट हुए हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव आयोजित किए गए थे, जहाँ उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल की। कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वह सदन में विपक्ष की आवाज़ को मजबूती प्रदान करते रहे हैं। भारत में राज्यसभा चुनाव की यह प्रक्रिया प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय अक्सर भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया और विधायी स्थिरता पर नजर रखता है। राज्यसभा में सीटों का समीकरण यह तय करता है कि केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कितनी सुगमता से पारित करा पाएगी। भाजपा की बढ़ती ताकत और विपक्ष के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति भारतीय संसद के उच्च सदन में संतुलन और बहस के स्तर को प्रभावित करेगी। अब सभी की निगाहें 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जहाँ शेष तीन सीटों के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने इन परिणामों की पुष्टि करते हुए निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र जारी कर दिए हैं। संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस फेरबदल से आने वाले सत्रों में सदन की कार्यवाही और विधायी एजेंडे पर व्यापक असर पड़ेगा।
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