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राज्यसभा चुनाव 2026: मल्लिकार्जुन खरगे और सतीश पूनिया समेत कई दिग्गज निर्विरोध निर्वाचित

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 01:00 am
राज्यसभा चुनाव 2026: मल्लिकार्जुन खरगे और सतीश पूनिया समेत कई दिग्गज निर्विरोध निर्वाचित

कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में राज्यसभा की सीटें निर्विरोध भरी गईं। मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा जैसे दिग्गजों की संसद में वापसी हुई है।

भारत में राज्यसभा चुनाव 2026 की प्रक्रिया के बीच एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद कई दिग्गज नेताओं को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है। संसद के उच्च सदन में होने वाली इस एंट्री से आगामी सत्रों में विधायी चर्चाओं का स्वरूप तय होगा। कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के लिए यह एक महत्वपूर्ण जीत है, जहां पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर अपनी सीट सुरक्षित की है। उनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। कर्नाटक की राजनीतिक स्थिरता और संख्या बल को देखते हुए विपक्षी दलों ने इन सीटों पर चुनौती नहीं पेश की, जिससे इनका रास्ता साफ हो गया। राजस्थान की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। राजस्थान से राज्यसभा जाने वाले नेताओं की इस सूची में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच सीटों का बंटवारा विधानसभा में उनके मौजूदा प्रतिनिधित्व के आधार पर हुआ। किसी भी अतिरिक्त उम्मीदवार के मैदान में न होने के कारण चुनाव अधिकारियों ने नामांकन की जांच के बाद विजेताओं की आधिकारिक घोषणा कर दी। मध्य प्रदेश और गुजरात में भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही। भाजपा ने इन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। तरुण चुघ जैसे कद्दावर नेताओं की राज्यसभा में एंट्री भाजपा की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है। इन चुनावों के परिणामों से स्पष्ट है कि राजनीतिक दलों ने जोड़-तोड़ के बजाय अपने सुरक्षित कोटे की सीटों पर ध्यान केंद्रित किया है। प्रवासी भारतीय समुदाय और विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों के लिए ये चुनाव काफी महत्वपूर्ण हैं। राज्यसभा में विदेश नीति और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों पर अक्सर चर्चा होती है। मल्लिकार्जुन खरगे जैसे अनुभवी नेता के सदन में होने से विपक्षी स्वर मुखर रहेंगे, जबकि सतीश पूनिया और तरुण चुघ जैसे नेता सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। ऑस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग समझौते (AI-ECTA) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुमोदन में भी राज्यसभा की भूमिका अहम होती है। संसद के उच्च सदन की संरचना में यह बदलाव भारत की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भारत के प्रतिनिधित्व को भी प्रभावित करेगा। निर्वाचित उम्मीदवारों को जल्द ही सदस्यता की शपथ दिलाई जाएगी, जिसके बाद वे आधिकारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे।
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