राजनीति
राजस्थान रियल एस्टेट ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला: नगर परिषद पाली पर लगा जुर्माना रद्द, दोबारा सुनवाई के आदेश
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 09:30 am

राजस्थान रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने नगर परिषद पाली पर लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कोविड-19 विस्तार और परियोजना समयसीमा के तर्कों को देखते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा है।
राजस्थान रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (REAT) ने रियल एस्टेट क्षेत्र के नियमों के अनुपालन को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायाधिकरण ने नगर परिषद पाली के विरुद्ध राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) द्वारा पारित एकपक्षीय जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है। यह मामला मुख्य रूप से प्रोजेक्ट पंजीकरण के विस्तार न करने और उसके परिणामस्वरूप लगाए गए दंड से संबंधित था।
मामले के तथ्यों के अनुसार, राजस्थान रेरा ने पहले नगर परिषद पाली पर प्रोजेक्ट पंजीकरण की समयसीमा समाप्त होने के बावजूद उसे विस्तारित न करने के कारण भारी जुर्माना लगाया था। प्राधिकरण का तर्क था कि प्रमोटर ने नियमों का उल्लंघन किया है। हालांकि, नगर परिषद ने इस निर्णय को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी। परिषद का मुख्य तर्क यह था कि उनके पक्ष को उचित तरीके से नहीं सुना गया और आदेश एकपक्षीय (ex-parte) था।
सुनवाई के दौरान, नगर परिषद पाली के प्रतिनिधियों ने न्यायाधिकरण को बताया कि प्रोजेक्ट की समयसीमा में देरी के पीछे कई वैध कारण थे। इनमें सबसे प्रमुख कारण कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन और उसके बाद सरकार द्वारा घोषित स्वतः विस्तार (automatic extensions) थे। परिषद ने तर्क दिया कि इन परिस्थितियों को रेरा द्वारा उचित महत्व नहीं दिया गया, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ।
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत प्रमोटर को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने माना कि चूंकि प्रमोटर ने प्रोजेक्ट की समयसीमा और कोविड-19 से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी आधार पेश किए हैं, इसलिए मामले को योग्यता के आधार पर दोबारा सुना जाना आवश्यक है। इसके साथ ही, रेरा के पुराने आदेश को निरस्त कर मामले को वापस (remand) भेज दिया गया है।
यह निर्णय ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले उन अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए भी विशेष महत्व रखता है जो राजस्थान में रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश करते हैं। अक्सर देखा गया है कि सरकारी निकायों द्वारा संचालित परियोजनाओं में देरी होती है, और ऐसे कानूनी स्पष्टीकरणों से निवेशकों को यह समझने में मदद मिलती है कि नियामक तंत्र किस तरह से काम कर रहा है। आईएनसी24 के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि रेरा के कड़े नियमों के बावजूद, ट्रिब्यूनल प्रमोटरों को असाधारण परिस्थितियों में राहत देने के लिए तैयार है, जो अंततः परियोजना के पूर्ण होने की संभावना को बढ़ाता है।
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