राजनीति
राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को दी 20 दिन की पैरोल; इलाज के लिए जेल से बाहर आएंगे स्वयंभू धर्मगुरु
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 02:37 am

राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य आधार पर आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी है। अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश में, नाबालिग के साथ यौन शोषण के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को 20 दिनों की पैरोल मंजूर की है। यह निर्णय न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रकाश सोनी की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। अदालत का यह आदेश आसाराम के गिरते स्वास्थ्य और उचित चिकित्सा उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आया है।
आसाराम, जो वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, ने अपने स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के खोपोली में स्थित एक आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए पैरोल की मांग की थी। इससे पहले, जेल प्रशासन और जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और गवाहों की सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी पैरोल याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार आसाराम की पैरोल रोकने के लिए पर्याप्त और ठोस कारण पेश करने में विफल रही है।
अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि आसाराम की उम्र (लगभग 83 वर्ष) और उनकी वर्तमान शारीरिक स्थिति को देखते हुए, उन्हें चिकित्सा सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। न्यायाधीशों ने उल्लेख किया कि जेल के भीतर उनकी पूर्व की आचरण रिपोर्ट और उनकी वृद्धावस्था को देखते हुए, उन्हें पुलिस निगरानी में इलाज कराने की अनुमति देना न्यायसंगत है। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पैरोल की अवधि के दौरान आसाराम को कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा और वह पुलिस की देखरेख में रहेंगे।
आसाराम को 2018 में पोक्सो (POCSO) कानून और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया था। तब से वह जेल में ही हैं। उनकी कानूनी टीम ने कई बार जमानत और सजा स्थगन की अपील की थी, जिन्हें बार-बार खारिज किया गया था। इस हालिया पैरोल को उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पीड़ित पक्ष और नागरिक अधिकार समूहों ने इस पर चिंता व्यक्त की है।
पीड़िता के परिवार ने इस फैसले पर अपनी असुरक्षा व्यक्त करते हुए कहा है कि आसाराम का जेल से बाहर आना उनके और मामले के गवाहों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। पुलिस प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि पैरोल की अवधि के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह समाचार विशेष रुचि का है। भारतीय कानूनी प्रणाली की निष्पक्षता और सजायाफ्ता अपराधियों के मानवाधिकारों जैसे विषयों पर प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर गहन चर्चा होती है। ICN24 इस मामले के हर कानूनी मोड़ पर नजर बनाए हुए है ताकि अपने पाठकों को सटीक और निष्पक्ष जानकारी उपलब्ध करा सके।
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