लाइव
राजनीति
राजनीति

पहले राहुल, अब अभिषेक: ममता बनर्जी के सामने सोनिया गांधी जैसी ही पुरानी दुविधा

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 07:00 am
पहले राहुल, अब अभिषेक: ममता बनर्जी के सामने सोनिया गांधी जैसी ही पुरानी दुविधा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी के अस्तित्व और भतीजे अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के बीच एक कठिन चुनाव का सामना कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी आज उसी चौराहे पर खड़ी नजर आ रही हैं, जहां कभी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी खड़ी थीं। यह दुविधा है पार्टी के व्यापक संगठनात्मक हितों और परिवार के उत्तराधिकारी के राजनीतिक भविष्य के बीच संतुलन बनाने की। जैसे सोनिया गांधी के समय राहुल गांधी का उदय पार्टी के पुराने दिग्गजों के लिए चुनौती बना था, वैसे ही आज अभिषेक बनर्जी का बढ़ता कद टीएमसी के भीतर पुराने और नए खेमे के बीच दरार पैदा कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति एक 'अग्निपरीक्षा' की तरह है। एक तरफ अभिषेक बनर्जी हैं, जो पार्टी को आधुनिक बनाने और उसे बंगाल के बाहर ले जाने का दृष्टिकोण रखते हैं। दूसरी तरफ पार्टी के वे पुराने वफादार नेता हैं जिन्होंने ममता के साथ मिलकर जमीन से पार्टी को खड़ा किया। अभिषेक का आक्रामक अंदाज और सांगठनिक बदलाव अक्सर इन अनुभवी नेताओं को रास नहीं आता, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए भी गहरी दिलचस्पी का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय अक्सर पश्चिम बंगाल की स्थिरता को निवेश और सांस्कृतिक संबंधों के नजरिए से देखते हैं। टीएमसी के भीतर नेतृत्व का कोई भी संकट न केवल राज्य के शासन को प्रभावित करता है, बल्कि प्रवासी भारतीयों के बीच राज्य की छवि पर भी असर डालता है। सोनिया गांधी के दौर में, राहुल गांधी को आगे बढ़ाने के प्रयास में कई क्षेत्रीय क्षत्रपों ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या वह अभिषेक को नेतृत्व सौंपते समय अपनी पार्टी को टूटने से बचा पाएंगी? वर्तमान में भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच एजेंसियों के दबाव के बीच, पार्टी को एकजुट रखना ममता के लिए एक दोहरी चुनौती बन गया है। अंततः, ममता बनर्जी का फैसला ही टीएमसी का भविष्य तय करेगा। क्या वह एक 'पार्टी-प्रथम' दृष्टिकोण अपनाएंगी या फिर अपने उत्तराधिकारी के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए कड़े सांगठनिक जोखिम उठाएंगी? बंगाल की राजनीति का यह अध्याय आने वाले राष्ट्रीय चुनावों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

सर्बिया ने उज्बेकिस्तान को मध्य एशिया का प्रमुख भागीदार बताया, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
राजनीति

सर्बिया ने उज्बेकिस्तान को मध्य एशिया का प्रमुख भागीदार बताया, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा

सर्बिया ने उज्बेकिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करते हुए उसे मध्य एशिया में अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी घोषित किया है।

4 अग॰ 2026, 10:37 pm
स्टालिन के बयान पर भड़कीं दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियां, खुशबू सुंदर ने की तृषा से माफी की मांग
राजनीति

स्टालिन के बयान पर भड़कीं दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियां, खुशबू सुंदर ने की तृषा से माफी की मांग

उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों पर दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में भारी आक्रोश है। खुशबू सुंदर सहित कई अभिनेत्रियों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया है।

4 अग॰ 2026, 09:37 pm
चाबहार बंदरगाह पर मंडराते संकट के बादल: क्या भारत सुरक्षित रख पाएगा अपना रणनीतिक व्यापार मार्ग?
राजनीति

चाबहार बंदरगाह पर मंडराते संकट के बादल: क्या भारत सुरक्षित रख पाएगा अपना रणनीतिक व्यापार मार्ग?

ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश अब अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण खतरे में है। जानें यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

4 अग॰ 2026, 08:38 pm