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पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: नई नियुक्तियों के बाद प्रदेश इकाई में बढ़ी बेचैनी

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 10:31 pm
पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: नई नियुक्तियों के बाद प्रदेश इकाई में बढ़ी बेचैनी

पंजाब कांग्रेस के पुनर्गठन और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व प्रताप सिंह बाजवा को बरकरार रखे जाने से पार्टी के भीतर असंतोष के सुर तेज हो गए हैं।

चंडीगढ़ में कांग्रेस आलाकमान द्वारा पंजाब इकाई के पुनर्गठन की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में बरकरार रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही, तीन नए कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधना है। हालांकि, इस फैसले ने पार्टी के भीतर एक नई बहस और बेचैनी को जन्म दे दिया है। पार्टी के भीतर इस बेचैनी का मुख्य कारण कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई पूर्व मंत्री और अनुभवी विधायक खुद को दरकिनार किए जाने से असंतुष्ट हैं। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी एक बड़ी चुनौती रही है, और नई नियुक्तियों के बाद यह दरार और चौड़ी होती दिख रही है। वड़िंग और बाजवा की जोड़ी को बरकरार रखने का निर्णय एक तरफ निरंतरता का संकेत देता है, तो दूसरी तरफ उन नेताओं के लिए निराशा लेकर आया है जो नेतृत्व में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे थे। तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति को पार्टी के 'शक्ति संतुलन' के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सभी गुटों को विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) का मुकाबला करना चुनौतीपूर्ण होगा। विशेष रूप से मालवा, माझा और दोआबा क्षेत्रों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष उभर रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम का प्रभाव भारत की सीमाओं से परे ऑस्ट्रेलिया में बसे विशाल पंजाबी समुदाय पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRIs) पंजाब की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। आईजीएन24 (ICN24) से बात करते हुए सिडनी में रहने वाले कुछ समुदाय के सदस्यों ने कहा कि पंजाब में राजनीतिक स्थिरता उनके निवेश और पैतृक गांव के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी डायस्पोरा अक्सर पंजाब के राजनीतिक दलों के लिए फंड और समर्थन का एक बड़ा स्रोत रहा है, ऐसे में पार्टी के भीतर की कलह प्रवासियों के बीच भी चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा इस आंतरिक असंतोष को कैसे शांत करते हैं। यदि असंतुष्ट नेताओं को समय रहते साथ नहीं लिया गया, तो पार्टी के लिए एकजुट होकर चुनाव लड़ना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान के लिए चुनौती केवल नई नियुक्तियां करना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर अनुशासन और सामंजस्य बनाए रखना भी है।
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