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पंजाब भाजपा में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति से अंतर्कलह तेज: क्या आंतरिक एकजुटता दांव पर है?

ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 12:01 am
पंजाब भाजपा में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति से अंतर्कलह तेज: क्या आंतरिक एकजुटता दांव पर है?

पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष के रूप में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति ने पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और नए चेहरों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है।

चंडीगढ़/मेलबर्न: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों ने पार्टी के भीतर एक नई बहस और असंतोष को जन्म दे दिया है। पिछले महीने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। ढिल्लों, जो पहले कांग्रेस के एक कद्दावर नेता रहे हैं, की पदोन्नति को लेकर भाजपा के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पंजाब की राजनीति में भाजपा पारंपरिक रूप से एक छोटी खिलाड़ी रही है, जो अक्सर शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में रही। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने अपने दम पर विस्तार करने की कोशिश की है। इस रणनीति के तहत, भाजपा ने अन्य दलों, विशेष रूप से कांग्रेस से आए कई बड़े चेहरों को शामिल किया है। केवल सिंह ढिल्लों इसी श्रेणी में आते हैं। पार्टी आलाकमान का मानना है कि ढिल्लों जैसे अनुभवी नेता के आने से भाजपा को मालवा क्षेत्र और सिख समुदाय के बीच पैठ बनाने में मदद मिलेगी। लेकिन इस कदम का दूसरा पहलू पार्टी की 'आंतरिक सामंजस्य' (Internal Cohesion) की कमी के रूप में सामने आ रहा है। पार्टी के पुराने निष्ठावान नेताओं का तर्क है कि 'बाहरी' नेताओं को उच्च पद देने से उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है जिन्होंने दशकों तक विपरीत परिस्थितियों में पार्टी का झंडा उठाए रखा। यह मुद्दा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बसे पंजाबी प्रवासी समुदाय के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जो राज्य की राजनीति पर करीब से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले पंजाबी डायस्पोरा के लिए पंजाब की राजनीतिक स्थिरता महत्वपूर्ण है। कई प्रवासी भारतीयों का मानना है कि भाजपा का यह प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है। यदि पार्टी अपने पुराने कैडर और नए नेताओं के बीच संतुलन नहीं बना पाती है, तो आगामी चुनावों में उसे संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि ढिल्लों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों को एक साथ लाना है। पंजाब में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही भाजपा के लिए अनुशासन और एकजुटता सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि केंद्रीय नेतृत्व इस आंतरिक कलह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या ढिल्लों सभी को साथ लेकर चलने में सफल होते हैं।
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