राजनीति
इंदौर: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री का 'मौन विरोध', मंच छोड़कर जाने से सियासी सरगर्मी तेज
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 11:39 am
इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे के मंच छोड़कर जाने से संगठन में मची रार सतह पर आ गई है।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के सियासी गलियारों में एक बार फिर आंतरिक गुटबाजी और प्रोटोकॉल के उल्लंघन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। शुक्रवार को अटल पथ पर आयोजित एक भव्य सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे मंच छोड़कर चले गए। इस घटना ने न केवल संगठन के भीतर के मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है, बल्कि आगामी स्थानीय समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा घटनाक्रम इंदौर नगर निगम द्वारा आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण और प्रतिमा स्थापना के भूमिपूजन के दौरान हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित इंदौर के लगभग सभी विधायक और वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे। गौरव रणदिवे भी निमंत्रण पर वहां पहुंचे और अन्य नेताओं के साथ डायस के पीछे खड़े होकर 'वंदे मातरम्' में शामिल हुए। लेकिन राष्ट्रगीत समाप्त होते ही वे अचानक मंच से नीचे उतर गए और कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले गए।
रणदिवे का इस तरह अचानक जाना वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के लिए हैरानी का सबब बन गया। सियासी हलकों में चर्चा है कि मंच पर उनके पद के अनुरूप बैठने की व्यवस्था (कुर्सी) नहीं थी। बाद में इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गौरव रणदिवे ने कहा, "मैं साढ़े पांच साल तक नगर अध्यक्ष रहा और वर्तमान में पार्टी का प्रदेश महामंत्री हूं। मैंने कभी मन का छोटापन नहीं रखा, लेकिन व्यक्ति का प्रोटोकॉल भले न करें, उसके पद का प्रोटोकॉल जरूर होना चाहिए।" उनके इस बयान से स्पष्ट संकेत मिलता है कि मंच पर उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वे अपेक्षा कर रहे थे।
इस विवाद के पीछे केवल कुर्सी का मामला ही नहीं, बल्कि इंदौर विधानसभा-3 में बढ़ती गुटबाजी को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। हाल ही में क्षेत्र में रणदिवे की एक धार्मिक यात्रा के पोस्टर लगे थे, जिसमें क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की तस्वीरें गायब थीं। पार्टी के भीतर एक गुट का मानना है कि इसी खींचतान की वजह से उन्हें कार्यक्रम में उपेक्षित महसूस कराया गया।
इंदौर भाजपा में प्रोटोकॉल के उल्लंघन का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले दशहरा मैदान के एक कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन के साथ भी ऐसा ही हुआ था, जहां सूची में नाम न होने की बात कहकर उन्हें मंच पर जाने से रोका गया था। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो भारत की राजनीति और विशेषकर मध्य प्रदेश के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखते हैं, यह घटना दर्शाती है कि सत्ता पक्ष के भीतर सांगठनिक अनुशासन और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने हालांकि डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए कहा कि रणदिवे को किसी अन्य यात्रा में शामिल होना था, लेकिन अंदरूनी कलह की गूंज अब भोपाल तक पहुंच चुकी है।
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