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बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर की दो-टूक: 'भाजपा की हार का मतलब यह नहीं कि वे कमजोर हो गए'

ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 07:37 pm
बांकीपुर में जीत के बाद प्रशांत किशोर की दो-टूक: 'भाजपा की हार का मतलब यह नहीं कि वे कमजोर हो गए'

बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज की जीत के बाद प्रशांत किशोर ने भाजपा की ताकत पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने समर्थकों को आगाह किया कि एक हार से भाजपा कमजोर नहीं हुई है।

बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की है। इस जीत को राज्य के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ी सेंध माना जा रहा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत के बाद प्रशांत किशोर का लहजा उत्साह से ज्यादा सावधानी भरा नजर आया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांकीपुर में भाजपा की हार को उनकी कमजोरी का संकेत मानना एक बड़ी भूल होगी। पटना में मीडिया और समर्थकों को संबोधित करते हुए किशोर ने कहा, "राजनीति में एक चुनाव का परिणाम पूरे संगठन की स्थिति तय नहीं करता। भाजपा एक मजबूत कैडर आधारित पार्टी है। बांकीपुर में हमारी जीत जनता की आकांक्षाओं की जीत है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि भाजपा कमजोर हो गई है या उसकी पकड़ ढीली पड़ गई है। हमें यह समझने की जरूरत है कि बड़ी लड़ाई अभी बाकी है।" यह बयान किशोर की उस रणनीतिक सोच को दर्शाता है जिसमें वे अपनी टीम को अति-उत्साह से बचाकर लंबी दौड़ के लिए तैयार करना चाहते हैं। बिहार में दशकों से राजनीति राजद, जदयू और भाजपा के त्रिकोण के इर्द-गिर्द घूमती रही है। जन सुराज की इस जीत ने प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले बिहारी समुदाय के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो बिहार की राजनीति को बारीकी से ट्रैक करते हैं, इस बदलाव को 'जाति आधारित राजनीति' से 'विकास और प्रबंधन आधारित राजनीति' की ओर एक कदम मान रहे हैं। कई जानकारों का मानना है कि किशोर की रणनीति भाजपा के ही संगठनात्मक मॉडल को चुनौती देने की है, इसीलिए वे भाजपा को कम आंकने की गलती नहीं करना चाहते। प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि भाजपा के पास राष्ट्रव्यापी संसाधन और एक स्थापित नेतृत्व है। उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के चयन के कारण कभी-कभी बड़ी पार्टियों को हार का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी वापसी की क्षमता हमेशा बनी रहती है। किशोर का मुख्य उद्देश्य बिहार के मतदाताओं को एक विश्वसनीय तीसरा विकल्प देना है, जो केवल विरोध की राजनीति न करे बल्कि एक ठोस विकल्प पेश करे। इस चुनाव परिणाम के बाद अब सबकी नजरें आगामी विधानसभा चुनावों पर हैं। क्या जन सुराज बांकीपुर की इस लय को पूरे बिहार में बरकरार रख पाएगा? किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने की है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से जमीन पर काम जारी रखने और जनता के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने का आह्वान किया है।
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