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बालाघाट में पीएम आवास योजना में धांधली: मृत व्यक्ति के खाते में भेजी गई किश्त, ग्रामीण ने की शिकायत

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 08:31 pm
बालाघाट में पीएम आवास योजना में धांधली: मृत व्यक्ति के खाते में भेजी गई किश्त, ग्रामीण ने की शिकायत

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहाँ एक मृत व्यक्ति के खाते में योजना की राशि ट्रांसफर कर दी गई।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत गरीबों को घर देने के वादे के बीच, खैरलांजी जनपद पंचायत में एक जीवित पात्र हितग्राही की जगह एक मृत व्यक्ति के खाते में आवास की किश्त डाल दी गई है। इस गंभीर गड़बड़झाले के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित हितग्राही, राजू दमाहे ने इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत खैरलांजी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। राजू दमाहे का आरोप है कि वह इस योजना के तहत लाभ पाने का हकदार था, लेकिन विभागीय मिलीभगत या घोर लापरवाही के चलते उसके हक की राशि किसी ऐसे व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर दी गई जिसकी मृत्यु हो चुकी है। राजू ने प्रशासन से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) और 'जियो-टैगिंग' जैसी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बावजूद, एक मृत व्यक्ति के नाम पर राशि का भुगतान होना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया में भारी चूक हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे पंचायत स्तर के अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत सरकार डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा कर रही है। प्रवासी भारतीय समुदाय, जो भारत में हो रहे विकास और ग्रामीण सुधारों पर बारीकी से नजर रखता है, के लिए ऐसी खबरें चिंताजनक हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग अक्सर अपने पैतृक गांवों में बुनियादी ढांचे और पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं, लेकिन इस तरह के मामले व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करते हैं। फिलहाल, जनपद पंचायत के अधिकारियों ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है। राजू दमाहे ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही इस गड़बड़झाले को सुधारा नहीं गया और उन्हें उनके हक का आवास नहीं मिला, तो वे जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारियों तक अपनी बात ले जाएंगे। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन अपनी गलती सुधारकर वास्तविक हितग्राही को न्याय दिला पाता है या यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाता है।
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