राजनीति
अफसरों को नहीं थी भनक: पीएम मोदी ने सचिवों की बैठक में तैयार किया भविष्य का रोडमैप, AI और डेटा पर जोर
ICN24 Newsroom 21 अग॰ 2026, 05:38 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के शीर्ष सचिवों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें भविष्य की कार्ययोजना और एआई के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत सरकार के सचिवों के साथ अपनी तीसरी उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि अधिकारियों को इस व्यापक एक्शन प्लान की पहले से कोई भनक नहीं थी। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के विजन के साथ काम कर रही है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य नौकरशाही में वर्षों से चली आ रही पारंपरिक कार्यशैली को बदलकर उसे अधिक परिणामोन्मुख और आधुनिक बनाना है।
बैठक की 'इनसाइड स्टोरी' यह है कि पीएम मोदी ने विभागों के बीच की दूरी यानी 'साइलो' को खत्म करने पर सबसे अधिक जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अलग-अलग मंत्रालय एक टीम की तरह काम नहीं करेंगे, तब तक देश के विकास की गति को अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंचाया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने विभागीय सीमाओं से बाहर निकलकर एक सामूहिक लक्ष्य के लिए काम करें। यह पहल विशेष रूप से उन प्रवासी भारतीयों और ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो भारत में व्यापार करना चाहते हैं, क्योंकि इससे लालफीताशाही में कमी आने की उम्मीद है।
तकनीकी मोर्चे पर, प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा के बेहतर इस्तेमाल को शासन का आधार बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि डेटा का सही विश्लेषण न केवल नीति निर्माण में मदद करता है, बल्कि यह भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में भी सहायक है। एआई के माध्यम से सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत की यह तकनीकी छलांग वैश्विक स्तर पर, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में भी अहम भूमिका निभाएगी, जहां तकनीक और नवाचार पर आपसी सहयोग बढ़ रहा है।
इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू युवाओं और विश्वविद्यालयों की भागीदारी था। पीएम मोदी ने फैसला लिया कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में अब केवल वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं, बल्कि युवा दिमाग और यूनिवर्सिटीज के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इससे सरकारी नीतियों में आधुनिकता और नए विचारों का समावेश होगा। उन्होंने सचिवों से कहा कि वे विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करें ताकि अकादमिक शोध का लाभ सीधे शासन और प्रशासन को मिल सके।
अंत में, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अगले कुछ साल भारत के इतिहास में निर्णायक होने वाले हैं और इसमें नौकरशाही की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यह बैठक केवल प्रशासनिक नहीं थी, बल्कि यह भारत के भविष्य की आधारशिला रखने वाली एक रणनीतिक चर्चा थी, जिसने अधिकारियों को एक नए जोश और दिशा के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया है।
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