राजनीति
लाल किले से मोदी का सप्तधारा मंत्र: हथियारबंद नक्सलवाद खत्म, अब 'दिमागी नक्सल' से निपटने की चुनौती
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 08:37 pm

80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने लाल किले से 2047 के 'विकसित भारत' का खाका पेश किया और देश को 'दिमागी नक्सलवाद' के प्रति आगाह किया।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक नए भारत का संकल्प दोहराया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की विकास नीतियों को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने विशेष रूप से 'सप्तधारा' (विकास की सात धाराएं) का मंत्र देते हुए 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा। प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं था, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के प्रति एक गंभीर चेतावनी भी थी।
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने लंबे संघर्ष के बाद हथियारबंद नक्सलवाद पर लगभग पूरी तरह काबू पा लिया है। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता चुनने वाले तत्व अब हाशिए पर हैं। हालांकि, उन्होंने एक नई और अधिक सूक्ष्म चुनौती की ओर इशारा किया, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सलवाद' या बौद्धिक नक्सलवाद करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि विकास की राह में रोड़ा अटकाने वाले ये 'दिमागी नक्सल' समाज को भीतर से खोखला करने और युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से इस वैचारिक खतरे के प्रति सजग रहने की अपील की।
विकसित भारत के विजन को धरातल पर उतारने के लिए प्रधानमंत्री ने 'सप्तधारा' का रोडमैप पेश किया। इसमें अधोसंरचना (Infrastructure), सुशासन (Governance), सामाजिक न्याय (Social Justice), आत्मनिर्भरता (Self-reliance), आधुनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे सात प्रमुख स्तंभों को शामिल किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि जब ये सात धाराएं एक साथ प्रवाहित होंगी, तभी भारत वैश्विक मंच पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो सकेगा। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति वैश्विक प्रवासियों के लिए नए अवसर और सम्मान का मार्ग प्रशस्त करती है।
युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ने दो महत्वपूर्ण पहलों का उल्लेख किया। पहला, एक आधुनिक और सुदृढ़ सिविल डिफेंस नेटवर्क का निर्माण, जिसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। दूसरा, आगामी जनगणना प्रक्रिया में तकनीक का समावेश। पीएम मोदी ने बताया कि आगामी जनगणना 'ऐप-आधारित स्व-जनगणना' (App-based self-census) होगी। उन्होंने युवाओं से इस डिजिटल अभियान में नेतृत्व करने का आह्वान किया ताकि सटीक आंकड़ों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री ने अंत में विश्वास जताया कि 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयास से 2047 का सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि आज का भारत न रुकता है, न थकता है और न ही झुकता है। लाल किले से दिया गया यह संदेश स्पष्ट था: विकास की गति को तेज करना है और देश की एकता को तोड़ने वाली वैचारिक ताकतों से सतर्क रहना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख और घरेलू मोर्चे पर सुधारों की यह जुगलबंदी आने वाले दशकों में भारत की नियति तय करेगी।
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