राजनीति
कीर्ति आजाद की भाजपा को सीधी चुनौती: 'वंदे मातरम' के सभी पद गाकर दिखाएं, फिर दें देशभक्ति पर भाषण
ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 09:37 pm

तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद ने भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सभी अंतरे गाने की चुनौती देते हुए उनके राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए हैं।
भारतीय राजनीति में राष्ट्रवाद और प्रतीकों को लेकर चल रही बहस एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को एक अनोखी और कड़ी चुनौती दी है। आजाद ने सीधे तौर पर भाजपा नेताओं से कहा है कि वे मंचों से देशभक्ति की बातें करने से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सभी पदों (स्टैंजा) को गाकर दिखाएं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
कीर्ति आजाद, जो स्वयं कभी भाजपा का हिस्सा रहे हैं और 1983 की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे हैं, ने भाजपा की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रवाद का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए करती है। आजाद के अनुसार, राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों का सम्मान केवल नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके पीछे की गहराई और साहित्य का ज्ञान भी होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेता, जो दूसरों को देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांटते हैं, उन्हें स्वयं 'वंदे मातरम' की पूरी पंक्तियां याद नहीं होंगी।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में राजनीतिक रैलियों के दौरान राष्ट्रवाद एक मुख्य मुद्दा बना हुआ है। कीर्ति आजाद ने कहा, "मैं भाजपा के उन नेताओं को चुनौती देता हूं जो खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा पैरोकार बताते हैं। वे आएं और सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम के सभी पद गाकर सुनाएं। यदि वे ऐसा नहीं कर सकते, तो उन्हें दूसरों की देशभक्ति पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भारत की यह आंतरिक राजनीतिक हलचल हमेशा से रुचि का विषय रही है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में राष्ट्रवाद की परिभाषा और राजनीतिक विमर्श पर चर्चा करते हैं। कीर्ति आजाद का यह बयान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि यह प्रतीकात्मक राजनीति बनाम वास्तविक ज्ञान के मुद्दे को उठाता है। प्रवासी समुदाय के बीच भी यह चर्चा आम है कि क्या राष्ट्रवाद केवल प्रतीकों तक सीमित है या इसका अर्थ समावेशी विकास और सांस्कृतिक समझ से जुड़ा है।
भाजपा की ओर से फिलहाल इस पर तीखी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है, लेकिन पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे आजाद की 'हताशा' करार दिया है। भाजपा का तर्क रहा है कि 'वंदे मातरम' और तिरंगा उनके लिए केवल प्रतीक नहीं बल्कि आस्था का विषय हैं। हालांकि, आजाद की यह चुनौती सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही है, जहां लोग अब राष्ट्रीय गीत के इतिहास और उसके पूर्ण पाठ को लेकर अपनी राय साझा कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में राजनीति अब केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि पहचान और प्रतीकों के इर्द-गिर्द भी मजबूती से बुनी जा रही है।
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