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प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा: रक्षा, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नई रणनीतिक छलांग

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 02:31 am
प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा: रक्षा, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नई रणनीतिक छलांग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली स्लोवाकिया यात्रा रक्षा सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-यूरोप संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 और 15 जून को मध्य यूरोपीय राष्ट्र स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यूरोप की मुख्य भूमि में स्थित स्लोवाकिया न केवल भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है, बल्कि रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी नई दिल्ली के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और स्लोवाकिया के संबंध 1993 में स्लोवाकिया के एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरने के बाद से ही मजबूत रहे हैं। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में, ब्रातिस्लावा भारत को सैन्य तकनीक और हार्डवेयर की आपूर्ति करने वाला एक पारंपरिक सहयोगी रहा है। हालांकि, पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य इस संबंध को केवल 'क्रेता-विक्रेता' के ढांचे से ऊपर उठाकर सह-उत्पादन और सह-विकास के स्तर पर ले जाना है। 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत अब दोनों देश उन्नत सैन्य तकनीकों, जैसे कि 155-मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर, लाइट टैंक और इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि अब स्लोवाकिया भी भारत से रक्षा तकनीकें खरीदने में रुचि दिखा रहा है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती निर्माण क्षमता को दर्शाता है। आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। पिछले तीन वर्षों में भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 प्रतिशत बढ़कर 1.6 बिलियन यूरो तक पहुंच गया है। टाटा ऑटो कंपोनेंट्स और जगुआर लैंड रोवर जैसे बड़े भारतीय ब्रांड पहले से ही वहां सक्रिय हैं। 90 के दशक में भारतीय सड़कों पर लोकप्रिय 'मटाडोर F307' जैसे वाहन भी स्लोवाकियाई तकनीक की ही देन थे, जो दोनों देशों के बीच दशकों पुराने औद्योगिक संबंधों की याद दिलाते हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के माध्यम से इन संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा के क्षेत्र में, स्लोवाकिया की विशेषज्ञता भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। स्लोवाकिया अपनी 65 प्रतिशत बिजली परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान नागरिक परमाणु ऊर्जा पर सहयोग को लेकर मौजूदा समझौतों को और विस्तार दिए जाने की संभावना है, जो भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो यह दौरा यूरोप में भारत के बढ़ते सॉफ्ट पावर को भी रेखांकित करता है। स्लोवाकिया में भारतीय कार्यबल तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ वर्तमान में 11,000 भारतीय काम कर रहे हैं और आने वाले समय में एक लाख से अधिक कुशल भारतीय पेशेवरों की आवश्यकता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान जिस तरह स्लोवाकिया ने भारतीय छात्रों को निकालने में मदद की, उसने दोनों देशों के बीच भरोसे की नींव को और गहरा किया है। पीएम मोदी की यह यात्रा न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगी, बल्कि मध्य यूरोप में भारत के रणनीतिक प्रभाव को भी नया आयाम देगी।
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