राजनीति
'हूल दिवस' पर प्रधानमंत्री मोदी ने संताल विद्रोह के नायकों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 02:26 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हूल दिवस के अवसर पर सिद्धू-कान्हू और अन्य जनजातीय नायकों के बलिदान को याद करते हुए संताल विद्रोह की ऐतिहासिक भूमिका को सराहा।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'हूल दिवस' के अवसर पर देश के उन जनजातीय नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से अमर शहीद सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फूलों-झानो के साहस और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
हूल दिवस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह 30 जून 1855 को तत्कालीन बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में शुरू हुए संताल विद्रोह की याद में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों का साहस अतुलनीय है। उन्होंने अन्याय और विदेशी शोषण के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी, वह हर भारतीय के मन में देशभक्ति का भाव जगाती है। यह विद्रोह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी दो साल पहले हुआ था, जो भारतीय जनजातीय समाज की राजनीतिक चेतना और प्रतिरोध की शक्ति को दर्शाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने हजारों संतालों का नेतृत्व किया था। उनके साथ उनकी बहनों, फूलों और झानो ने भी कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। इस विद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिला कर रख दिया था। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार जनजातीय गौरव को संजोने और उनके योगदान को इतिहास में उचित स्थान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में शुरू किए गए विभिन्न 'जनजातीय गौरव' कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह दिन एक विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई सांस्कृतिक संगठन अक्सर इन ऐतिहासिक गौरव गाथाओं को अपनी नई पीढ़ी के साथ साझा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इन 'गुमनाम' नायकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से प्रवासियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि 'विकसित भारत' के निर्माण में जनजातीय समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नायकों के बलिदान से मिली प्रेरणा हमें समावेशी विकास की ओर ले जाएगी। हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की उस भावना का प्रतीक है, जिसे आज भारत वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर रहा है। सरकार के प्रयासों से अब इन नायकों के संग्रहालय और स्मारक भी बनाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उनके साहस से परिचित हो सकें।
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