राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा: द्विपक्षीय वार्ता और G7 शिखर सम्मेलन पर टिकीं दुनिया की नजरें
ICN24 Admin 13 जून 2026, 06:03 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जहाँ वह G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चाएँ करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी महत्वपूर्ण बहु-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करना और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करना है। अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री फ्रांस में आयोजित होने वाले आगामी G7 शिखर सम्मेलन में एक विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में भाग लेंगे, जहाँ वह जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल परिवर्तन जैसे ज्वलंत वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण साझा करेंगे।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। रक्षा, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के रोडमैप पर भी विचार-विमर्श करेंगे। फ्रांस, भारत का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है, और यह दौरा इस साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़ने की संभावना रखता है।
यात्रा के दूसरे चरण में, प्रधानमंत्री स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुँचेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस मध्य यूरोपीय देश की पहली यात्राओं में से एक है, जो मध्य यूरोप के साथ भारत के बढ़ते राजनयिक पदचिह्न को दर्शाती है। यहाँ वह स्लोवाक नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे, जिसका मुख्य केंद्र निवेश, नवाचार और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग होगा। मध्य यूरोप को भारतीय कंपनियों के लिए एक उभरते हुए बाजार के रूप में देखा जा रहा है, और यह दौरा व्यापारिक बाधाओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा।
शिखर सम्मेलन के हाशिए पर, प्रधानमंत्री मोदी के कई वैश्विक नेताओं के साथ पुल-साइड और औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। इन वार्ताओं में यूक्रेन संकट के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों के शामिल होने की उम्मीद है। भारत ने लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के समाधान की वकालत की है, और प्रधानमंत्री इस मंच का उपयोग शांति और स्थिरता के संदेश को प्रसारित करने के लिए करेंगे।
यह दौरा न केवल भारत की 'एक्ट ईस्ट' और 'लिंक वेस्ट' नीतियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है, बल्कि यह यूरोप के साथ भारत के बहुआयामी संबंधों की महत्ता को भी रेखांकित करता है। जैसे-जैसे वैश्विक भू-राजनीति में बदलाव आ रहा है, फ्रांस और स्लोवाकिया जैसे देशों के साथ भारत का संवाद वैश्विक शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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