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अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के डी-डे भाषण पर विवाद: क्या सैन्य श्रद्धांजलि का राजनीतिकरण हुआ?
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 05:30 am

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को फ्रांस में डी-डे की सालगिरह पर दिए गए भाषण के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन पर एक गंभीर सैन्य आयोजन को राजनीतिक रंग देने का आरोप है।
फ्रांस के नॉर्मंडी में डी-डे (D-Day) की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम विवादों के घेरे में आ गया है। नवनियुक्त अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा दिए गए भाषण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छेड़ दी है। हेगसेथ, जो डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, पर आरोप है कि उन्होंने सैनिकों के बलिदान को याद करने के लिए रखे गए एक गंभीर कार्यक्रम का उपयोग अपने राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए किया।
नॉर्मंडी के समुद्र तट पर, जहां हजारों मित्र देशों के सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्राणों की आहुति दी थी, हेगसेथ ने अपने संबोधन के दौरान प्रवासन नीतियों और नाटो (NATO) सहयोगियों की भूमिका पर टिप्पणी की। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस भाषण को लेकर तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आलोचकों ने हेगसेथ को 'अपमानजनक' और 'अपरिपक्व' करार दिया है, जबकि उनके समर्थकों का तर्क है कि वह केवल वर्तमान वैश्विक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे थे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और पूर्व सैनिकों के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों का द्वितीय विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और सैन्य परंपराओं में श्रद्धांजलि आयोजनों को राजनीति से ऊपर रखा जाता है। हेगसेथ की टिप्पणियों ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या भविष्य में राजनयिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधनों में बदलाव आएगा। विशेष रूप से, उनके द्वारा आव्रजन (immigration) को सुरक्षा चुनौती के रूप में पेश करने से उन प्रवासी समुदायों में चिंता बढ़ गई है जो पश्चिमी देशों की रक्षा नीतियों में सक्रिय रूप से योगदान देते हैं।
विपक्ष का तर्क है कि डी-डे जैसे अवसर एकता और कृतज्ञता के प्रतीक होने चाहिए, न कि विभाजनकारी घरेलू राजनीति का मंच। हेगसेथ ने अपने भाषण में संकेत दिया कि अमेरिका को अपने सहयोगियों पर निर्भरता कम करनी चाहिए और अपनी सीमाओं को अधिक मजबूती से सुरक्षित करना चाहिए। इस रुख ने यूरोपीय देशों और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख सहयोगियों के बीच भविष्य की सैन्य रणनीतियों को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
अभी तक पेंटागन या व्हाइट हाउस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। हालांकि, यह घटना दर्शाती है कि आगामी अमेरिकी चुनावों और नई प्रशासनिक नियुक्तियों का प्रभाव न केवल अमेरिका के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संबंधों और ऐतिहासिक सम्मान की परंपराओं पर भी पड़ रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का राजनीतिकरण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक मर्यादाओं को कमजोर कर सकता है।
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