राजनीति
पाकिस्तान की साजिश: पीओके में प्रदर्शनों को दबाने के लिए 'गुंडे' भेजने की तैयारी, हिंसा भड़काने का है प्लान
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 06:33 pm

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को हिंसक मोड़ देने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा कथित तौर पर साजिश रची जा रही है।
नई दिल्ली और इस्लामाबाद से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कई महीनों से जारी शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत एक खतरनाक साजिश रच रही है। स्थानीय सूत्रों और विश्लेषकों का दावा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां और वहां का प्रशासन प्रदर्शनकारियों के बीच 'भाड़े के गुंडों' को भेजने की योजना बना रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण चल रहे विरोध प्रदर्शनों में अराजकता फैलाना और उसे हिंसक रूप देना है, ताकि बाद में सेना और अर्धसैनिक बलों की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को सही ठहराया जा सके।
पीओके में जनता पिछले लंबे समय से आटे की बढ़ती कीमतों, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी अधिकारों की कमी को लेकर सड़कों पर है। यह आंदोलन 'अवामी एक्शन कमेटी' के नेतृत्व में बेहद अनुशासित और अहिंसक रहा है, जिसने पाकिस्तानी प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। अब खबरें आ रही हैं कि सरकार इस आंदोलन के नैरेटिव यानी कथानक को बदलना चाहती है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को 'अराजक तत्व' साबित करने के लिए भीड़ में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जो तोड़फोड़ और आगजनी करेंगे।
इस मामले पर नजर रख रहे विशेषज्ञों का कहना है कि जब प्रदर्शन हिंसक हो जाएंगे, तो पाकिस्तान के पास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह कहने का मौका होगा कि वे केवल 'कानून और व्यवस्था' बनाए रखने के लिए बल प्रयोग कर रहे हैं। यह एक पुरानी रणनीति है जिसे अक्सर सत्तावादी शासन अपने नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। पीओके में मानवाधिकारों की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है और इस नए घटनाक्रम ने स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच डर पैदा कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई संगठनों ने समय-समय पर पीओके में हो रहे मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग, जो इस क्षेत्र की भू-राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं, मानते हैं कि पाकिस्तान की यह चाल न केवल कश्मीर के लोगों के लिए घातक है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी खतरा है।
पीओके के मुजफ्फराबाद और अन्य प्रमुख शहरों में स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी बाहरी घुसपैठिए की पहचान करने के लिए अपनी स्वयंसेवक टीमें तैनात कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक और आर्थिक अधिकारों के लिए है और वे पाकिस्तानी हुकूमत को अपनी जायज मांगों को दबाने के लिए हिंसा का बहाना नहीं बनाने देंगे। आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, क्योंकि प्रशासन प्रदर्शनकारियों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है।
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