राजनीति
जौहर यूनिवर्सिटी पर संकट: रामपुर विकास प्राधिकरण ने 38 इमारतों को अवैध घोषित कर दिया ध्वस्तीकरण का आदेश
ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 07:32 pm

रामपुर विकास प्राधिकरण ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें गिराने का आदेश दिया है, जिससे आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बनी 40 इमारतों में से 38 को अवैध घोषित करते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। प्रशासन का कहना है कि इन इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र (नक्शा) के किया गया था, जो उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक लड़ाइयों का सामना कर रहा है। आरडीए के अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन को इन इमारतों की वैधता साबित करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन वे आवश्यक दस्तावेज और स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत करने में विफल रहे। इसके बाद, प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि यह कानून के तहत की गई एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि राज्य में किसी भी अवैध निर्माण को अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वह किसी भी संस्था या व्यक्ति से जुड़ा हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल दो इमारतों को ही नियमों के अनुरूप पाया गया है, जबकि शेष बुनियादी ढांचे में गंभीर अनियमितताएं हैं।
दूसरी ओर, आजम खान के समर्थकों और समाजवादी पार्टी ने इस कदम को 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दिया है। उनका तर्क है कि मौजूदा सरकार जानबूझकर शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बना रही है ताकि एक विशेष राजनीतिक विचारधारा को कमजोर किया जा सके। इस मुद्दे ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'बुलडोजर कार्रवाई' पर बहस छेड़ दी है, जिसे विपक्षी दल अक्सर संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते रहे हैं।
प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उत्तर प्रदेश मूल के लोगों के लिए, यह घटनाक्रम राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत में भूमि सुधार और अवैध निर्माणों पर नकेल कसने की प्रक्रिया को जहां एक वर्ग सुशासन मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे चुनिंदा कार्रवाई के रूप में देख रहा है।
आने वाले दिनों में यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचने की संभावना है। यदि प्रशासन अपने आदेश पर कायम रहता है, तो यह विश्वविद्यालय के भविष्य और वहां पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों की शिक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा सकता है। फिलहाल, रामपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासनिक अधिकारी अगले कदमों की समीक्षा कर रहे हैं।
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