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काम में बाधा डालने वाले अफसरों पर एक्शन की तैयारी: मध्य प्रदेश में जल्द आएगी बड़ी तबादला सूची

ICN24 Newsroom 16 जुल॰ 2026, 04:32 pm
काम में बाधा डालने वाले अफसरों पर एक्शन की तैयारी: मध्य प्रदेश में जल्द आएगी बड़ी तबादला सूची

मध्य प्रदेश सरकार मंत्रियों के निर्देशों की अनदेखी करने वाले आईएएस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रही है। जल्द ही राज्य में एक बड़ी प्रशासनिक फेरबदल की संभावना है।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अब उन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है, जो सरकार की योजनाओं और मंत्रियों के निर्देशों को लागू करने में ढिलाई बरत रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसे अधिकारियों की एक सूची तैयार कर ली गई है जिन्हें जल्द ही उनके वर्तमान पदों से हटाकर 'लूप लाइन' में भेजा जा सकता है। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया जा रहा है जिनमें मंत्रियों और उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि कुछ वरिष्ठ नौकरशाह जानबूझकर नीतिगत निर्णयों में देरी कर रहे हैं या उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। राज्य प्रशासन में यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री सचिवालय अब जिला स्तर से लेकर मंत्रालय तक के कामकाज की बारीकी से निगरानी कर रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जनता के हित में लिए गए फैसलों में किसी भी प्रकार की नौकरशाही अड़चन बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगामी तबादला सूची में न केवल उन अधिकारियों को बदला जाएगा जो आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, बल्कि उन जिलों के कलेक्टरों और संभाग आयुक्तों पर भी गाज गिर सकती है जहां विकास कार्यों की गति धीमी है। विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा के विभागों से जुड़ी फाइलों को अटकाने वाले अधिकारियों को चिन्हित किया गया है। यह प्रशासनिक सर्जरी आगामी बजट सत्र और भविष्य की चुनावी रणनीतियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर भी सुगबुगाहट है कि कुछ अधिकारी पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर थे और वर्तमान सरकार के एजेंडे के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार 'परफॉर्मेंस' पर आधारित है और जो अधिकारी परिणाम देने में विफल रहेंगे, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने से राज्य में निवेश के अवसर बढ़ते हैं। एनआरआई समुदाय अक्सर भारत में प्रशासनिक देरी और लालफीताशाही की शिकायत करता रहा है। ऐसे में यदि मोहन यादव सरकार नौकरशाही को चुस्त-दुरुस्त करने में सफल रहती है, तो इससे राज्य के विकास और बाहरी निवेश को नई गति मिल सकती है। आने वाले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस 'प्रशासनिक सर्जरी' में किन-किन दिग्गजों के विभाग बदले जाते हैं।
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