ऑस्ट्रेलिया
कुजी में एक सदी पहले हुई मौत के बाद भी ऑस्ट्रेलिया में 'शार्क कल्स' पर बहस जारी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:18 am

सिडनी के कुजी बीच पर एक किशोर की शार्क के हमले में मौत के 100 साल बाद भी, समुद्री सुरक्षा और शार्क के शिकार को लेकर ऑस्ट्रेलिया में राय बंटी हुई है।
सिडनी के मशहूर कुजी बीच पर साल 1922 में 18 वर्षीय मिल्टन कफ़लन पर हुए शार्क के जानलेवा हमले को आज एक सदी से भी अधिक समय बीत चुका है। उस हृदयविदारक घटना ने ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तटों की सुरक्षा नीति को हमेशा के लिए बदल दिया था, लेकिन आज भी एक बुनियादी सवाल देश को दो धड़ों में बांटे हुए है: क्या शार्क को मारना या उन्हें जाल में फंसाना वास्तव में इंसानों को सुरक्षित रखता है?
ऑस्ट्रेलिया में शार्क के हमले के बाद अक्सर 'शार्क कल्स' (चुनिंदा रूप से शार्क को मारने) की मांग उठती है। विशेष रूप से न्यू साउथ वेल्स (NSW) और क्वींसलैंड में सरकारें दशकों से 'शार्क मेशिंग प्रोग्राम' के तहत समुद्र में जाल बिछाती रही हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने इन जालों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। आंकड़ों के अनुसार, ये जाल न केवल शार्क को रोकते हैं, बल्कि कछुए, डॉल्फिन और अन्य समुद्री जीवों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें 'बाय-कैच' कहा जाता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो सिडनी और पर्थ जैसे तटीय शहरों में बड़ी संख्या में बसता है, समुद्र तट जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। हाल के वर्षों में भारत से आए नए प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच समुद्र में तैरने की लोकप्रियता बढ़ी है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय बन गया है। समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों में अक्सर यह समझाया जाता है कि किन क्षेत्रों में शार्क जाल लगे हैं और वहां तैरना कितना सुरक्षित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1920 के दशक की तुलना में आज हमारे पास बेहतर तकनीक है। अब 'स्मार्ट ड्रमलाइन्स' और ड्रोन निगरानी का उपयोग किया जा रहा है, जो शार्क को मारने के बजाय उन्हें टैग करने और दूर भेजने में मदद करते हैं। सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का तर्क है कि शार्क जाल सुरक्षा का एक 'झूठा आभास' देते हैं, क्योंकि शार्क अक्सर इन जालों के ऊपर या नीचे से निकल सकती हैं।
तटीय परिषदों और स्थानीय निवासियों के बीच अब भी इस बात को लेकर संघर्ष जारी है कि क्या पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की जाए या मानवीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। जहां कुछ लोग पुरानी व्यवस्था (जाल बिछाने) को जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं युवा पीढ़ी और पर्यावरण प्रेमी तकनीक आधारित सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। कुजी की वह ऐतिहासिक घटना आज भी एक अनुस्मारक की तरह है कि प्रकृति और मानव के बीच का संतुलन बनाना कितना जटिल है।
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