ऑस्ट्रेलिया
जमानत पर विवाद: घर में घुसपैठ की आरोपी महिला को उसी इमारत में रहने की अनुमति, जहां रहते हैं पीड़ित
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 12:31 pm

ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने घर में घुसपैठ की आरोपी एक महिला को उसी अपार्टमेंट परिसर में रहने की जमानत दी है जहाँ पीड़ित रहते हैं, जिससे सुरक्षा चिंताओं पर बहस छिड़ गई है।
ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत के हालिया फैसले ने कानूनी हलकों और आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। मामला एक महिला से जुड़ा है जिस पर घर में जबरन घुसने (होम इनवेजन) का गंभीर आरोप है। चौंकाने वाली बात यह है कि अदालत ने महिला को जमानत देते हुए उसे उसी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने की अनुमति दे दी है, जहाँ उसके कथित पीड़ित रहते हैं। यह फैसला न केवल कानूनी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता है, बल्कि उन पीड़ितों की मानसिक स्थिति और सुरक्षा पर भी गंभीर चिंता पैदा करता है जिन्हें अब हर दिन अपनी कथित हमलावर का सामना करना पड़ सकता है।
अदालत की सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष की वकील ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल के पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं है। वकील ने अदालत को बताया कि यदि उसे उस विशेष अपार्टमेंट में रहने की अनुमति नहीं दी गई, तो वह बेघर हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया में वर्तमान में चल रहे गंभीर आवास संकट (Housing Crisis) के मद्देनजर, अदालत अक्सर उन मामलों में उदार रुख अपनाती है जहाँ आरोपी के पास सिर छिपाने की जगह न हो। हालांकि, इस मामले में आरोपी और पीड़ित की निकटता ने एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है।
यह घटना विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों जैसे मेलबर्न, सिडनी और ब्रिस्बेन में रहने वाले भारतीय मूल के प्रवासी अक्सर उच्च घनत्व वाले अपार्टमेंट परिसरों (High-density apartment complexes) में रहते हैं। इस समुदाय के लिए पड़ोसियों के साथ सुरक्षा और विश्वास एक महत्वपूर्ण पहलू है। ऐसी अदालती मिसालें उन प्रवासियों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकती हैं जो कानून-व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। सामुदायिक संगठनों का कहना है कि जब कोई आरोपी और पीड़ित एक ही लिफ्ट या कॉरिडोर का उपयोग करते हैं, तो यह न केवल डरावना होता है बल्कि इससे गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत देने का उद्देश्य निर्दोषता के अनुमान (Presumption of innocence) को बनाए रखना है, लेकिन इसमें 'सुरक्षा' एक प्राथमिक शर्त होनी चाहिए। आमतौर पर, जमानत की शर्तों में यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि आरोपी को पीड़ित के घर या कार्यस्थल के एक निश्चित दायरे (जैसे 200 या 500 मीटर) से दूर रहना होगा। इस मामले में, उसी इमारत में रहने की अनुमति देना उन बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन प्रतीत होता है।
पीडि़त पक्ष ने इस फैसले पर गहरा सदमा व्यक्त किया है। उनका कहना है कि वे अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, मानवाधिकार समर्थकों का कहना है कि किसी को केवल आवास की कमी के कारण जेल में नहीं रखा जा सकता जब तक कि वह समाज के लिए तात्कालिक खतरा न हो। यह मामला ऑस्ट्रेलिया की न्याय प्रणाली के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करता है: कैसे एक आरोपी के आवास के अधिकार और एक पीड़ित की सुरक्षा के अधिकार के बीच संतुलन बनाया जाए। फिलहाल, पुलिस को इस स्थिति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन निवासियों के बीच डर का माहौल बना हुआ है।
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