ऑस्ट्रेलिया
गर्भस्थ शिशु के विकास का मानक पैमाना बन सकता है खतरा: शोध में 'वन-साइज़-फिट्स-ऑल' चार्ट पर उठे सवाल
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 10:31 am
एक नए अध्ययन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में इस्तेमाल होने वाले मानक भ्रूण विकास चार्ट शिशुओं के स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करने में विफल हो सकते हैं।
गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के विकास की निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मौजूदा मानक चार्ट को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। ब्रिटेन में शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन से पता चला है कि 'वन-साइज़-फिट्स-ऑल' यानी सभी के लिए एक समान पैमाना अपनाने वाले ये चार्ट अक्सर शिशुओं को गलत तरीके से वर्गीकृत करते हैं। इससे न केवल जोखिम वाले बच्चों की पहचान छूटने का खतरा रहता है, बल्कि अनावश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप (interventions) की संभावना भी बढ़ जाती है।
ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आमतौर पर 'हैडलॉक' (Hadlock) नामक चार्टिंग सिस्टम पर निर्भर करते हैं। यह प्रणाली ब्रिटेन में भी काफी प्रचलित है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि यह मानक प्रणाली हर मां और बच्चे की व्यक्तिगत शारीरिक विशेषताओं को ध्यान में नहीं रखती है, जो विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई जैसे विविध समुदायों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
इस अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की टीम ने 2015 से 2025 के बीच हुई लगभग 32 लाख जन्मों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोध में यह तुलना की गई कि अलग-अलग चार्ट के आधार पर शिशुओं को 'बहुत छोटा' या 'बहुत बड़ा' किस दर पर वर्गीकृत किया गया। परिणामों से संकेत मिला कि यदि मां के वजन और उसकी जातीय पृष्ठभूमि (ethnic origin) के आधार पर 'कस्टमाइज्ड ग्रोथ चार्ट' का उपयोग किया जाए, तो डेटा कहीं अधिक सटीक और विश्वसनीय हो सकता है।
भारतीय समुदाय के संदर्भ में यह शोध अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि विभिन्न नस्लीय समूहों में शिशुओं के जन्म के समय का सामान्य वजन अलग-अलग हो सकता है। एक मानक चार्ट, जो संभवतः पश्चिमी शारीरिक बनावट पर आधारित हो, किसी स्वस्थ भारतीय बच्चे को 'अंडरवेट' मान सकता है या किसी गंभीर समस्या को सामान्य बताकर नजरअंदाज कर सकता है। कस्टमाइज्ड चार्ट के उपयोग से डॉक्टर यह अधिक सटीकता से पहचान सकेंगे कि किस शिशु को गर्भ में अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि चार्ट में सुधार न केवल 'स्टिलबर्थ' (मृत जन्म) के जोखिम को कम करने में मदद करेगा, बल्कि उन माताओं को अनावश्यक सिजेरियन या प्री-मैच्योर डिलीवरी के दबाव से भी बचाएगा, जिनके बच्चे वास्तव में स्वस्थ हैं लेकिन मानक चार्ट पर फिट नहीं बैठते। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि स्वास्थ्य प्रणालियों को अब व्यक्तिगत डेटा के आधार पर तैयार किए गए आधुनिक निगरानी तंत्र की ओर रुख करना चाहिए ताकि हर नवजात को सुरक्षित शुरुआत मिल सके।
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