ऑस्ट्रेलिया
'सूखे का संकट': ऑस्ट्रेलियाई अनाज उत्पादकों को अच्छी बारिश का इंतजार, पैदावार पर मंडराया खतरा
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 10:31 am

ऑस्ट्रेलिया के मुख्य अनाज उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कम पैदावार की आशंका के बीच किसान अब अच्छी वर्षा की उम्मीद कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों में इस साल सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। देश के कई हिस्सों में किसान अब आसमान की ओर देख रहे हैं, क्योंकि मिट्टी में नमी की कमी के कारण सर्दियों की फसलों, विशेष रूप से गेहूं और जौ की पैदावार प्रभावित होने का खतरा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण कृषि बेल्टों में बारिश का स्तर औसत से काफी नीचे रहा है, जिसे किसान 'शुष्क पक्ष' (drier side) करार दे रहे हैं।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। यहां के उत्पादकों का कहना है कि हालांकि सीजन की शुरुआत में कुछ उम्मीदें जगी थीं, लेकिन उसके बाद से बारिश के आंकड़ों में निरंतर गिरावट देखी गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो फसलों के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में बाधा आ सकती है, जिससे न केवल गुणवत्ता बल्कि कुल उत्पादन की मात्रा में भी बड़ी कमी आ सकती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर काफी मायने रखती है, क्योंकि इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय ऑस्ट्रेलिया में कृषि, रसद (logistics) और थोक खाद्य व्यापार से जुड़ा हुआ है। विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई भारतीय मूल के किसान और उद्यमी सीधे तौर पर कृषि अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। अनाज के उत्पादन में गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजार में आटे और अन्य बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम परिवारों का बजट प्रभावित होने की संभावना है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े अनाज निर्यातकों में से एक है। भारत और अन्य एशियाई देशों को निर्यात किए जाने वाले अनाज की मात्रा में कमी आने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में खेती केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में बारिश की कमी न केवल किसानों की आय को कम करती है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसरों को भी सीमित कर देती है।
ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) के हालिया पूर्वानुमानों के अनुसार, आने वाले महीनों में मौसम का मिजाज मिला-जुला रहने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में हल्की फुहारों की उम्मीद है, लेकिन मिट्टी की गहराई तक नमी पहुँचाने वाली 'भीषण बारिश' की तत्काल कोई संभावना नहीं दिख रही है। किसान अब अपनी सिंचाई रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
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