राजनीति
रूस के साथ सैन्य सहयोग पर दक्षिण कोरिया-यूरोपीय संघ के बयान पर भड़का उत्तर कोरिया
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 09:01 pm

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ के उस संयुक्त बयान की कड़ी निंदा की है जिसमें रूस के साथ उसके सैन्य सहयोग को अवैध बताया गया था।
प्योंगयांग ने दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ (EU) द्वारा हाल ही में जारी किए गए उस संयुक्त बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों की आलोचना की गई थी। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए इसे संप्रभु देशों के बीच वैध संबंधों में 'अवैध हस्तक्षेप' करार दिया।
उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ के नेताओं ने हाल ही में एक बैठक के दौरान उत्तर कोरिया द्वारा रूस को हथियारों की आपूर्ति करने की कथित खबरों पर चिंता जताई थी। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया था। इसके जवाब में, उत्तर कोरिया ने तर्क दिया है कि रूस के साथ उसकी साझेदारी रक्षात्मक प्रकृति की है और यह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ लक्षित नहीं है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती भू-राजनीति का प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्वाड (QUAD) के सदस्य के रूप में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के पक्षधर हैं। उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी न केवल कोरियाई प्रायद्वीप, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा रूस को गोला-बारूद की आपूर्ति के बदले में मास्को से उन्नत सैन्य तकनीक मिलने की संभावना है। यह स्थिति दक्षिण कोरिया और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। उत्तर कोरिया ने पश्चिमी देशों पर 'दोहरा मापदंड' अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी खुद यूक्रेन को भारी मात्रा में हथियार दे रहे हैं, लेकिन अन्य देशों के आपसी सहयोग पर सवाल उठा रहे हैं।
भारत ने हमेशा से ही कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अक्सर वैश्विक सुरक्षा और व्यापार मार्गों की स्थिरता पर नजर रखते हैं, यह तनावपूर्ण स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, प्योंगयांग के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद मास्को के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना जारी रखेगा।
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