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NoKasa की नई पहल: पुराने कपड़ों से 'सर्कुलर इकोनॉमी' के जरिए कचरे को बिजनेस में बदलने की तैयारी
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 04:37 pm

नोकासा (NoKasa) कपड़े के कचरे को एक नए व्यापारिक अवसर में बदलकर फैशन उद्योग में टिकाऊ बदलाव ला रहा है, जो भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है।
दुनिया भर में फैशन उद्योग पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए 'नोकासा' (NoKasa) ने एक सराहनीय कदम उठाया है। नोकासा एक ऐसे बिजनेस मॉडल पर काम कर रहा है जो पुराने और फेंके गए कपड़ों को 'सर्कुलर इकोनॉमी' (वृत्ताकार अर्थव्यवस्था) का हिस्सा बनाकर उन्हें फिर से उपयोगी बना रहा है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी एक नए बाजार का निर्माण कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है। भारतीय संस्कृति में कपड़ों को बार-बार इस्तेमाल करने और उन्हें सहेज कर रखने की परंपरा रही है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और 'फास्ट फैशन' के दौर में कपड़ों का अंबार लग जाता है। नोकासा जैसी कंपनियां इस कचरे को संसाधनों में बदलने का काम कर रही हैं, जिससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम हो सके। आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया हर साल हजारों टन कपड़ा कचरा पैदा करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा कभी रीसायकल नहीं हो पाता।
नोकासा का मॉडल 'पुनर्चक्रण' (Recycling) और 'अपसाइकिलिंग' (Upcycling) पर आधारित है। कंपनी पुराने कपड़ों को एकत्रित करती है और उन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से नए उत्पादों या कच्चे माल में बदल देती है। इस प्रक्रिया को 'सर्कुलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें उत्पाद का जीवनचक्र खत्म नहीं होता, बल्कि वह नए रूप में बाजार में वापस आ जाता है। यह पहल भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) के क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रवासियों में रेशम, सूत और अन्य उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों का उपयोग अधिक होता है। यदि इन कपड़ों का सही ढंग से प्रबंधन किया जाए, तो वे उच्च-स्तरीय रीसाइक्लिंग के लिए बेहतरीन संसाधन साबित हो सकते हैं। नोकासा का उद्देश्य उपभोक्ताओं की मानसिकता में बदलाव लाना है, ताकि वे कपड़ों को 'उपयोग करो और फेंको' की वस्तु न मानकर एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखें।
आने वाले समय में, नोकासा जैसे नवाचार न केवल पर्यावरण को बचाएंगे, बल्कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता भी फैलाएंगे। मेलबर्न और सिडनी जैसे बड़े शहरों में रहने वाले भारतीय परिवार अब इस दिशा में जागरूक हो रहे हैं कि वे अपने पुराने कपड़ों को दान करने या फेंकने के बजाय, उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म पर दें जहां उनका वैज्ञानिक रूप से उपचार हो सके। नोकासा की यह यात्रा दर्शाती है कि कचरा वास्तव में कचरा नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जिसे हम अभी तक पहचान नहीं पाए थे।
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