राजनीति
बंगाल: कोलकाता की सड़कों से हटेंगे मुगलों और ब्रिटिश शासकों के नाम, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 02:41 pm

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि कोलकाता की सड़कों से मुगलों, पठानों और दमनकारी ब्रिटिश शासकों के नाम हटाए जाएंगे, जिससे सुहरावर्दी एवेन्यू को लेकर नया विवाद छिड़ गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता की ऐतिहासिक पहचान को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोलकाता की किसी भी सड़क का नाम अब मुगलों, पठानों या उन ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेगा जिन्होंने देश पर दमनकारी शासन किया। ममता बनर्जी का यह बयान उस समय आया है जब शहर के प्रसिद्ध सुहरावर्दी एवेन्यू के नामकरण को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
हाल ही में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने के प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लंबे समय से यह मांग करती रही है कि मुस्लिम शासकों और औपनिवेशिक काल के प्रतीकों को हटाया जाए। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस ताजा रुख ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के ही कुछ धड़ों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। ममता बनर्जी ने संकेत दिया कि सरकार का ध्यान अब उन नामों को हटाने पर है जो भारत के औपनिवेशिक या बाहरी आक्रमण के इतिहास से जुड़े हैं।
इस पूरे मामले में ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेतृत्व इतिहास की अधूरी समझ के आधार पर राजनीति कर रहा है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा नेताओं ने सर हसन सुहरावर्दी और हुसैन शहीद सुहरावर्दी के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। सर हसन सुहरावर्दी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति थे, जबकि हुसैन शहीद सुहरावर्दी अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री थे, जिन्हें 'डायरेक्ट एक्शन डे' की हिंसा के लिए विवादों में घेरा जाता है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग स्वर सुनाई दे रहे हैं। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री नाम बदलने की नीति का समर्थन कर रही हैं, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं ने पुराने नामों को बदलने की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि नाम बदलना इतिहास को मिटाने जैसा है, जबकि मुख्यमंत्री इसे 'स्वदेशी गौरव' को वापस लाने का एक प्रयास मान रही हैं। ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि सड़कों के नाम बंगाल के महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर होने चाहिए, न कि उन लोगों के नाम पर जिन्होंने भारत की संस्कृति पर प्रहार किया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए कोलकाता की विरासत का एक विशेष महत्व है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी अक्सर कोलकाता की सड़कों और वहां की पुरानी वास्तुकला से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं। इतिहास के इस पुनर्लेखन और सड़कों के नाम बदलने की प्रक्रिया को प्रवासी भारतीय बड़ी उत्सुकता से देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है, जो आगामी चुनावों में राष्ट्रवादी भावनाओं को भुनाने का एक प्रयास हो सकता है।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा जो नामों की समीक्षा करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में कोलकाता की गलियां केवल उन नायकों की गाथाएं सुनाएं जिन्होंने देश के निर्माण में सकारात्मक योगदान दिया। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सुहरावर्दी जैसे नामों को लेकर फैला भ्रम यह दर्शाता है कि यह फैसले ऐतिहासिक शोध के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए लिए जा रहे हैं।
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