राजनीति
सीमावर्ती स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस न मनाए जाने पर NHRC सख्त, पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 03:37 pm

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाए जाने पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पंजाब के सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में किसी भी प्रकार के उत्सव या कार्यक्रम आयोजित न किए जाने की खबरों पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने पंजाब सरकार को एक औपचारिक नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या इन क्षेत्रों के बच्चों को उन शैक्षिक, सांस्कृतिक और नागरिक अवसरों से वंचित रखा गया, जो राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले बच्चों को सुलभ थे।
आयोग की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की गहन जांच करें और चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह मामला तब प्रकाश में आया जब यह शिकायत की गई कि भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित कई सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त के अवसर पर न तो ध्वजारोहण हुआ और न ही कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मानवाधिकार आयोग ने इसे केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके भीतर राष्ट्रीय गौरव की भावना विकसित करने के अवसर के हनन के रूप में देखा है।
आयोग ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि भौगोलिक स्थिति के आधार पर बच्चों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में यह भी पूछा गया है कि क्या इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी या शिक्षकों की अनुपलब्धता इस स्थिति का कारण है। आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पंजाब से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता का विषय है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले कई पंजाबी परिवार अपने पैतृक गांवों के स्कूलों और वहां की शिक्षा व्यवस्था से गहराई से जुड़े हुए हैं। वे अक्सर अपने क्षेत्रों के विकास के लिए आर्थिक सहयोग भी देते हैं। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के बच्चों के साथ होने वाला यह भेदभाव प्रवासी भारतीयों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय पर्वों पर भी इन बच्चों को मुख्यधारा से अलग रखा जाएगा, तो यह उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
पंजाब के सीमावर्ती जिलों जैसे फिरोजपुर, फाजिल्का, अमृतसर और गुरदासपुर के कई गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। NHRC का यह हस्तक्षेप राज्य सरकार पर दबाव बनाएगा कि वह इन उपेक्षित क्षेत्रों की ओर ध्यान दे। अब सभी की निगाहें पंजाब सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि वास्तव में जमीनी स्तर पर इन स्कूलों की स्थिति क्या है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
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